कृषि से लेकर ग्रामीण सड़कों तक सरकार का बड़ा निवेश, मत्स्य, डेयरी और बुनियादी ढांचे को मिला मजबूत बजटीय सहारा

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को रफ्तार: कृषि, पशुपालन, मत्स्य और सड़क विकास पर हजारों करोड़ का प्रावधान
राज्य सरकार ने कृषि शिक्षा, अनुसंधान और बाजार से सीधा जुड़ाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बजट में कई अहम घोषणाएं की हैं। इस बजट का फोकस किसानों की आय बढ़ाने, पशुपालन और मत्स्य पालन को सशक्त करने के साथ-साथ ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मज़बूत करने पर रखा गया है।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में राज्य सरकार ने 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इस राशि से जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) का विस्तार किया जाएगा, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और मछुआ समुदाय की आमदनी बढ़ेगी।
डेयरी सेक्टर को मजबूती देने के लिए बजट में 90 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसके अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर और जगदलपुर में नई दूध प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी, जिससे दुग्ध उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सकेगा।

पशुधन विकास को ध्यान में रखते हुए पशुओं की नस्ल सुधार और चारा उत्पादन के लिए 18 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया गया है, जिससे पशुपालकों को दीर्घकालिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
ग्रामीण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना से गांवों में आवागमन और आधारभूत सुविधाओं में सुधार होगा।
सड़क और पुल निर्माण के क्षेत्र में भी बजट काफी प्रभावशाली रहा है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत 70 नई सड़कों और 21 पुलों के निर्माण के लिए 1700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा राज्य में 150 से अधिक नई सड़कों के निर्माण के लिए 475 करोड़ रुपये का अतिरिक्त प्रावधान किया गया है।
कुल मिलाकर यह बजट कृषि, पशुपालन और ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है, जिससे राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।




