राष्ट्रीय

पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ द्वारा विद्या वाचस्पति (मानद डॉक्टरेट) सारस्वत सम्मान समारोह का भव्य आयोजन

पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ द्वारा दिनांक 01 फरवरी 2026 को दिल्ली स्थित होटल रेडिसन ब्लू के सभागार में विद्या वाचस्पति (मानद डॉक्टरेट उपाधि) सारस्वत सम्मान समारोह का भव्य एवं गरिमामय आयोजन संपन्न हुआ।

इस समारोह में छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के शिक्षाविद्, ज्योतिष एवं सामुद्रिक विद्या के मर्मज्ञ, आध्यात्मिक एवं सामाजिक चिंतक पं. उमाशंकर चतुर्वेदी को शिक्षा, ज्योतिष, सामुद्रिक विद्या, धार्मिक–आध्यात्मिक प्रवचन तथा समाज सेवा के क्षेत्र में उनके अतुलनीय योगदान के लिए विद्या वाचस्पति सारस्वत मानद डॉक्टरेट उपाधि से सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पद्मश्री माननीय डॉ. अरविन्द कुमार जी (पूर्व कुलपति, रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झांसी) ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा तभी सार्थक होती है, जब वह समाज की वास्तविक समस्याओं का समाधान प्रस्तुत करे। उन्होंने शिक्षा में नवाचार, अनुसंधान एवं मूल्यों के समन्वय पर विशेष बल दिया।

समारोह की अध्यक्षता माननीय डॉ. इन्दु भूषण मिश्रा जी, कुलपति, पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ ने की। उन्होंने कहा कि विद्या वाचस्पति सम्मान ऐसे साधकों को समर्पित है, जिन्होंने ज्ञान को समाज-सेवा का माध्यम बनाया है। पं. उमाशंकर चतुर्वेदी का योगदान इसी परंपरा का श्रेष्ठ उदाहरण है।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता माननीय डॉ. ऋतु दुबे तिवारी जी (वरिष्ठ शिक्षाविद् एवं साहित्यकार, गाजियाबाद, उत्तर प्रदेश) ने अपने प्रेरक संबोधन में कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्ति का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली चेतना है। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों से युक्त शिक्षा ही राष्ट्र निर्माण का सुदृढ़ आधार है।

विशिष्ट अतिथि माननीय डॉ. विश्वनाथ पाणिग्रही जी (राष्ट्रीय पर्यावरणविद् एवं वर्ल्ड रिकॉर्ड धारक, बागबाहरा, महासमुंद) ने पर्यावरण संरक्षण को शिक्षा से जोड़ने की आवश्यकता पर बल दिया।
वहीं इस अवसर पर मंचस्थ विभूतियों में छत्तीसगढ़ भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष माननीय श्री प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने पं. दीनदयाल उपाध्याय हिंदी विद्यापीठ द्वारा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तित्वों को मानद उपाधि से सम्मानित करने तथा उत्कृष्ट आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

मंचस्थ विभूति माननीय कुलवंत सिंह सलूजा जी (पूर्व सदस्य, इस्पात मंत्रालय, भारत सरकार) ने शिक्षा के सामाजिक एवं सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए सम्मानित व्यक्तित्वों के योगदान की सराहना की।

उल्लेखनीय है कि पं. उमाशंकर चतुर्वेदी, स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट विद्यालय, जांजगीर-चांपा में शिक्षक के रूप में कार्यरत हैं। वे शिक्षा के साथ-साथ ज्योतिष एवं सामुद्रिक विद्या, भागवत एवं शिवपुराण कथाओं, आध्यात्मिक प्रवचनों तथा समाज सेवा के माध्यम से निरंतर जनकल्याण में संलग्न रहे हैं। विशेष रूप से व्यावसायिक शिक्षा, बालिका शिक्षा एवं समाज के वंचित वर्गों के उत्थान हेतु उनके प्रयास अत्यंत सराहनीय रहे हैं।

उनके धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रवचनों के अनेक प्रसंग एवं रचनाएं विभिन्न समाचार-पत्रों में प्रकाशित हो चुकी हैं। वे भैसमुड़ी निवासी, प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य एवं भागवत भूषण, कीर्तिशेष पं. गजाधर प्रसाद चतुर्वेदी के चिरंजीव हैं।

पं. उमाशंकर चतुर्वेदी को डॉक्टरेट उपाधि से अलंकृत किए जाने पर पं. देवेन्द्र चतुर्वेदी, देवी प्रसाद चतुर्वेदी, नंदकुमार चतुर्वेदी, मयंक चतुर्वेदी, शताक्षी चतुर्वेदी, समस्त चतुर्वेदी परिवार सहित डॉ. रविंद्र द्विवेदी, राजकुमार तंबोली, निमिषा जेम्स, राजेश उपाध्याय एवं समस्त सेजेस विद्यालय परिवार, साथ ही राजेश पाठक, गौरीशंकर श्रीवास, अशोक नागपूरे सहित अनेक शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं प्रबुद्धजनों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button