भारत दौरे पर पुतिन का भव्य स्वागत: राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी, राजघाट पर गांधी को दी श्रद्धांजलि

नई दिल्ली
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार साल के अंतराल के बाद भारत दौरे पर शुक्रवार को राजधानी पहुंचे। उनका राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी और गार्ड ऑफ ऑनर के साथ भव्य स्वागत किया गया। इस स्वागत समारोह में रक्षा और प्रोटोकॉल की पूरी तैयारी दिखाई गई, जो दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का प्रतीक है।
इस अवसर पर पुतिन ने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने गांधीजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उनके आदर्शों को सम्मानित किया। श्रद्धांजलि के दौरान पुतिन ने गांधी के जीवन और उनके अहिंसक संघर्ष पर विशेष ध्यान दिया।
इसके बाद पुतिन हैदराबाद हाउस के लिए रवाना हुए, जहाँ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। दोनों नेताओं की द्विपक्षीय बातचीत शुरू हो गई है, जिसके बाद वे 23वीं भारत-रूस समिट में शामिल होंगे। सूत्रों के अनुसार, इस दौरे के दौरान 25 से ज्यादा समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इनमें ऊर्जा, रक्षा, अंतरिक्ष और रणनीतिक सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते शामिल हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पुतिन का यह दौरा भारत-रूस के लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगा। पुतिन ने पहले ही संकेत दिए हैं कि इस दौरे में तेल और गैस क्षेत्र में सहयोग, नई तकनीकों में साझेदारी और रक्षा उपकरणों के आयात जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस दौरे को भी बड़े पैमाने पर कवर किया जा रहा है। ब्रिटेन के BBC ने लिखा कि यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब अमेरिका लगातार भारत पर दबाव डाल रहा है कि वह रूस से तेल की खरीद कम करे। वहीं यूक्रेनी मीडिया ने इसे भारत की कूटनीति की परीक्षा बताया है, क्योंकि भारत युद्धरत रूस और यूक्रेन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भारत और रूस के बीच संबंध कई दशकों से मजबूत हैं। कोल्ड वॉर के दौरान भी रूस ने भारत का समर्थन किया था। विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा दोनों देशों के व्यापारिक, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई ऊँचाइयों तक ले जाने वाला साबित हो सकता है।
इस दौरे से भारत की वैश्विक कूटनीति और रणनीतिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी। दोनों नेताओं की बातचीत और समिट के दौरान हुए समझौते भारत और रूस के बीच लंबे समय तक चलने वाले सहयोग का मार्ग प्रशस्त करेंगे।




