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Haldi In Cancer: कैंसर में हल्दी कितनी फायदेमंद? जानिए सही उपयोग, फायदे और जरूरी सावधानियां

हल्दी भारतीय रसोई का अहम हिस्सा है, लेकिन आयुर्वेद में इसे केवल मसाले के रूप में नहीं बल्कि औषधि के रूप में भी देखा जाता है। खासतौर पर कैंसर में हल्दी (Haldi In Cancer) को लेकर लोगों में काफी जिज्ञासा रहती है कि क्या यह वास्तव में फायदेमंद है और इसका सही इस्तेमाल कैसे किया जाए।
आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) नामक तत्व में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-ऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुण शरीर में सूजन को कम करने, फ्री रेडिकल्स से लड़ने और कैंसर के दौरान कोशिकाओं को होने वाले नुकसान को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकते हैं।
कैंसर में हल्दी कैसे मदद करती है?
करक्यूमिन कैंसर कोशिकाओं की वृद्धि को धीमा करने में सहायक माना जाता है
कैंसर और कीमोथेरेपी के कारण होने वाली सूजन को कम कर सकता है
शरीर की इम्युनिटी को सपोर्ट करता है
कीमोथेरेपी के साइड इफेक्ट्स को कुछ हद तक कम करने में मददगार हो सकता है
हालांकि, यह स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है कि हल्दी कैंसर का इलाज नहीं है, बल्कि यह केवल मुख्य उपचार (जैसे कीमोथेरेपी, रेडियोथेरेपी या सर्जरी) को सपोर्ट करने का काम करती है।
हल्दी का सही इस्तेमाल कैसे करें?
काली मिर्च के साथ: काली मिर्च में मौजूद पाइपेरिन करक्यूमिन के अवशोषण को कई गुना बढ़ा देता है
वसा के साथ सेवन: हल्दी फैट-सॉल्युबल होती है, इसलिए इसे घी, नारियल तेल या दूध के साथ लेना ज्यादा फायदेमंद होता है
हल्दी वाला दूध: आधा चम्मच हल्दी + एक चुटकी काली मिर्च को गुनगुने दूध में मिलाकर पीना लाभकारी माना जाता है
किन बातों का रखें ध्यान?
हल्दी का अत्यधिक सेवन पेट की समस्या पैदा कर सकता है
कुछ दवाओं के साथ हल्दी की प्रतिक्रिया हो सकती है
कैंसर जैसी गंभीर बीमारी में बिना डॉक्टर की सलाह के कोई घरेलू उपाय न अपनाएं
विशेषज्ञों का कहना है कि हल्दी को पूरक (Supplementary Support) के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि कैंसर के विकल्प उपचार के रूप में। किसी भी तरह के आयुर्वेदिक या घरेलू उपाय को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहद जरूरी है।

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