हसदेव का दर्द: रेत माफिया का खेल, अधिकारी बेख़बर

जांजगीर-चांपा
कभी जीवनदायिनी कही जाने वाली हसदेव नदी आज अपने अस्तित्व की जंग लड़ रही है। जिले में रेत माफिया खुलेआम नदी का सीना चीरकर अवैध खनन कर रहे हैं — और हैरानी की बात यह है कि प्रशासनिक और खनिज विभाग के अधिकारी मौन हैं।
रोजाना नदी किनारों पर ट्रैक्टर-ट्रॉली की कतारें रेत निकालती दिखाई देती हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग के दफ्तरों में सन्नाटा पसरा है। बाहर जनता शिकायत करती है, अंदर अधिकारी कागज़ों में व्यस्त या कुर्सियों पर आराम फरमा रहे हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह खनन दिन-रात जारी है। शिकायतें करने के बावजूद न तो पुलिस कार्रवाई करती है, न ही खनिज विभाग जागता है। ग्रामीणों के अनुसार —
“हम लोग कई बार शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं होती। रात में ट्रैक्टर चलते हैं, सब जानते हैं, पर कोई रोकने नहीं आता।”
जांच के नाम पर औपचारिकता निभाई जाती है, लेकिन हकीकत यह है कि माफिया बेखौफ होकर नदी की रेत लूट रहे हैं। जब इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारियों से बात करने की कोशिश की गई, तो या तो दरवाज़े बंद मिले, या जवाब टालमटोल वाले।


अब सवाल ये है —
क्या अधिकारी कार्रवाई से डर रहे हैं?
या फिर रेत माफियाओं से मिलीभगत की परतें हैं?
यदि यही हाल रहा, तो आने वाले वर्षों में हसदेव नदी का नाम सिर्फ नक्शों में बचेगा, धरातल पर नहीं।
हसदेव की रेत लूट का यह खेल कब रुकेगा, प्रशासन कब जागेगा — यही अब सबसे बड़ा सवाल है।
रिपोर्टर-दीपक यादव




