बलोद

यहां शरीर नहीं दिव्यांगों के हौसले दौड़ते हैं

जिला: बालोद

जिला ब्यूरो: के पी चंद्राकर

छत्तीसगढ़ के बालोद जिला में यह मैदान आज किसी खेल आयोजन का साधारण दृश्य नहीं है, बल्कि आत्मविश्वास की सबसे सशक्त तस्वीर बन चुका है। यहां हर खिलाड़ी अपने भीतर एक लंबा संघर्ष, अनगिनत अभ्यास और अपराजेय संकल्प लेकर उतरा है। पैरा एथलेटिक्स प्रतियोगिता यह सिद्ध करती है कि सीमाएं शरीर तय नहीं करता, बल्कि सोच तय करती है।उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि जिला पंचायत उपाध्यक्ष एवं रेड क्रॉस सोसाइटी के राज्य चेयरमैन तोमन साहू ने अपने उद्बोधन से यह स्पष्ट किया कि दिव्यांग खिलाड़ी समाज के लिए करुणा नहीं, बल्कि प्रेरणा के पात्र हैं। उन्होंने समान अवसर और सम्मान को सशक्त समाज की असली पहचान बताया।कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं जनपद अध्यक्ष सरस्वती टेमरीया ने इन खिलाड़ियों को आत्मनिर्भरता और आत्मगौरव का प्रतीक बताया। उनके शब्दों में यह भाव झलका कि जब मंच समान होता है, तो प्रतिभा अपने आप रास्ता बना लेती है।मैदान में दौड़ती व्हीलचेयर, हवा को चीरती छलांगें और तालियों की गूंज—सब मिलकर यह संदेश देती हैं कि दिव्यांगता कमजोरी नहीं, बल्कि एक अलग सामर्थ्य है। यह आयोजन समाज को सिखाता है कि सम्मान और अवसर मिलें, तो हर व्यक्ति इतिहास रच सकता है।

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