9 फरवरी का इतिहास: आज़ाद भारत की पहली जनगणना आज ही के दिन हुई थी शुरू, तब 36 करोड़ थी आबादी, आज 147 करोड़ पार

नई दिल्ली | 9 फरवरी 2026
9 फरवरी की तारीख भारत के इतिहास में जनगणना के लिहाज से बेहद अहम मानी जाती है। आज ही के दिन साल 1951 में आज़ाद भारत की पहली जनगणना की शुरुआत हुई थी। यह जनगणना देश के विभाजन के बाद बदली सीमाओं, बड़े पैमाने पर हुए पलायन और सामाजिक ढांचे को समझने के लिए बेहद जरूरी थी।
कब हुई थी पहली जनगणना
आजाद भारत की पहली जनगणना 9 फरवरी 1951 से शुरू होकर 28 फरवरी तक चली थी। इसके बाद 1 मार्च से 3 मार्च 1951 तक पुनरीक्षण कार्य किया गया। इस दौरान नागरिकों से नाम, उम्र, लिंग, धर्म, मातृभाषा, शिक्षा, आजीविका और आर्थिक स्थिति जैसी जानकारियां जुटाई गई थीं।
1951 में कितनी थी भारत की आबादी
1951 की जनगणना के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या 36 करोड़ 10 लाख 88 हजार 090 थी। उस समय देश की साक्षरता दर सिर्फ 18 प्रतिशत थी, जबकि औसत जीवन प्रत्याशा महज 32 वर्ष थी। प्रति 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 946 दर्ज की गई थी। धार्मिक आधार पर आबादी में हिंदू 84.1%, मुस्लिम 9.8%, ईसाई 2.3% और सिख 1.9% थे।
आज कितनी है भारत की जनसंख्या
वर्तमान समय में भारत दुनिया का सबसे ज्यादा आबादी वाला देश बन चुका है। विभिन्न आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत की आबादी 147 करोड़ से अधिक हो चुकी है। हर साल देश की जनसंख्या में करीब 1.5 करोड़ की बढ़ोतरी हो रही है। आज भारत की साक्षरता दर 80 प्रतिशत से ज्यादा पहुंच चुकी है।
भारत में जनगणना का इतिहास
भारत में हर 10 साल में जनगणना कराने की परंपरा रही है। आखिरी जनगणना 2011 में हुई थी, जबकि 2021 की जनगणना कोरोना महामारी और अन्य कारणों से टल गई। ब्रिटिश शासनकाल में पहली जनगणना 1872 में कराई गई थी, जबकि नियमित जनगणना की शुरुआत 1881 से मानी जाती है।
इस तरह 9 फरवरी न सिर्फ एक तारीख है, बल्कि भारत के जनसंख्या इतिहास की नींव रखने वाला दिन भी है।




