कूकरीचोली पंचायत में आवास और मनरेगा घोटाला, फर्जी जियो-टैगिंग से लाखों की बंदरबांटशिकायतों के बावजूद कार्रवाई शून्य, जिला प्रशासन की भूमिका पर सवाल

सरोज रात्रे / कोरबा
प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा जैसी गरीबों के लिए बनी केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाएं कोरबा जिले की ग्राम पंचायत कूकरीचोली में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती नजर आ रही हैं। पंचायत स्तर पर सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र की कथित मिलीभगत से फर्जी जियो-टैगिंग, झूठे दस्तावेज और मनरेगा में फर्जी मस्टर रोल के जरिए लाखों रुपये की सरकारी राशि के गबन का गंभीर मामला सामने आया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत में कई हितग्राहियों के मकान आज भी अधूरे हैं या शुरू ही नहीं हुए, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें पूर्ण दिखाकर दो से तीन किस्तों का भुगतान करा दिया गया। वास्तविक स्थिति यह है कि जिन गरीबों के लिए योजना बनी थी, वही आज अधूरे घरों में रहने को मजबूर हैं, जबकि कागजों में उनके आवास पूरे हो चुके हैं।
सरपंच के करीबी रिश्तेदार का अधूरा घर, रिकॉर्ड में पूर्ण सबसे चौंकाने वाला मामला नवनिर्वाचित सरपंच के करीबी रिश्तेदार मुरलीधर कंवर पिता चमार सिंह से जुड़ा है। मुरलीधर का आवास मौके पर आज भी अधूरा है, लेकिन ऑनलाइन पोर्टल और पंचायत रिकॉर्ड में उसका आवास पूर्ण दर्शाया गया है और मनरेगा के तहत पूरा भुगतान भी निकाल लिया गया है। खुद मुरलीधर ने स्वीकार किया कि उनका घर बरसात के समय से अधूरा है, जिसे वे आगे पूरा करेंगे।



दूसरे मकानों की फोटो लगाकर निकाली राशि इसी तरह हितग्राही गणेश सिंह कंवर का आवास भी अधूरा है। उनके पिता विष्णु सिंह ने बताया कि राशि कम पड़ने के कारण घर पूरा नहीं हो सका, लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में किसी अन्य मकान की फोटो अपलोड कर फर्जी जियो-टैगिंग के माध्यम से पूरी राशि आहरित कर ली गई। आरोप है कि मनरेगा के मस्टर रोल में भी फर्जी नाम जोड़कर भुगतान प्राप्त किया गया।
आवास मित्र की भूमिका केवल नाम की बताई जा रही है, जबकि अधिकांश कार्य रोजगार सहायक द्वारा ही संचालित किया जा रहा है।


शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं ग्रामीण अंकुश कुमार ने इस पूरे मामले की शिकायत एक बार नहीं बल्कि कई बार कलेक्टर जनदर्शन में की, लेकिन अब तक न तो किसी को निलंबित किया गया, न एफआईआर दर्ज हुई और न ही निष्पक्ष जांच हुई। ग्रामीणों का कहना है कि बीच में एक जांच टीम जरूर आई, लेकिन शिकायतकर्ता को बिना शामिल किए महज औपचारिकता निभाकर लौट गई, जिससे जांच की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुख्यमंत्री के निर्देशों की अनदेखी?
गौरतलब है कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कलेक्टर की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके बावजूद कूकरीचोली पंचायत में सामने आए इतने गंभीर आरोपों पर कार्रवाई नहीं होना जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और इच्छाशक्ति पर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों ने
पंचायत सचिव, रोजगार सहायक और आवास मित्र को तत्काल निलंबित करने,
पूरे मामले में एफआईआर दर्ज करने,
स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच दल गठित करने,
तथा दोषियों से रिकवरी की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सख्त कार्रवाई नहीं होगी, तब तक गरीबों को उनका हक नहीं मिलेगा और सरकारी योजनाएं भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ती रहेंगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है —
क्या कोरबा जिला प्रशासन दोषियों पर कार्रवाई करेगा, या फिर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण मिलता रहेगा?




