धमतरी में ‘गुरुछाया’ संगठन की मानवीय पहल—माता-पिता विहीन बच्चों की शिक्षा व भविष्य संवारने की मुहिम तेज

स्थान: धमतरी, छत्तीसगढ़
तारीख: 10 दिसंबर 2025
कहते हैं, जिनके सिर पर माता-पिता का हाथ होता है, वे बच्चे सचमुच किस्मत वाले होते हैं…
लेकिन समाज में कई बच्चे ऐसे भी हैं, जो इस छाया से वंचित हो जाते हैं।
धमतरी जिले में ऐसे ही बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए कुछ शिक्षक आगे आए हैं।
नगरी क्षेत्र के शिक्षकों ने ‘गुरुछाया’ नाम से संगठन बनाकर इन बच्चों की शिक्षा, मार्गदर्शन और रोजगार तक की जिम्मेदारी उठाई है।
इसी कड़ी में आज कुकरेल में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया…
मतरी। नगरी क्षेत्र के संवेदनशील शिक्षकों द्वारा गठित ‘गुरुछाया’ संगठन आज उन बच्चों के जीवन में नई रोशनी बनकर उभर रहा है, जिन्होंने कम उम्र में ही माता-पिता का साया खो दिया है। संगठन ने ऐसे बच्चों को शिक्षण संसाधन उपलब्ध कराने, उनकी पढ़ाई जारी रखने और भविष्य में रोजगार दिलाने तक का संकल्प लिया है।
इसी पहल के तहत कुकरेल में आज एक सम्मान कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहाँ माता-पिता विहीन बच्चों को अध्ययन-सामग्री, पुस्तकें, स्टेशनरी और अन्य आवश्यक संसाधन प्रदान किए गए। कार्यक्रम में बच्चों को मंच पर बुलाकर सम्मानित भी किया गया, जिससे उनमें आत्मविश्वास बढ़ सके।



संगठन से जुड़े शिक्षकों का कहना है कि माता-पिता के निधन के बाद कई बच्चे आर्थिक व मानसिक परेशानियों के कारण पढ़ाई से दूर हो जाते हैं। ‘गुरुछाया’ ऐसे बच्चों को न केवल शिक्षा से जोड़कर रखने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें भविष्य निर्माण के लिए प्रेरित भी करेगी।
संगठन ने यह भी बताया कि जिन बच्चों को किसी विशेष हुनर—जैसे कंप्यूटर, संगीत, खेल, सिलाई-कढ़ाई या अन्य कौशल—में रुचि होगी, उन्हें विशेष प्रशिक्षण देकर हुनरमंद बनाया जाएगा।
इसके साथ ही, भविष्य में रोजगार की दिशा में भी संगठन हर संभव सहयोग करेगा।
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों ने ‘गुरुछाया’ जैसी मानवीय पहल की सराहना की है, जो समाज में संवेदनशीलता और शिक्षा की नई मिसाल पेश कर रही है।




