जांजगीर-चांपा

मदनपुर में तालाब निर्माण के नाम पर अवैध खनन! — बिना अनुमति पत्थरों की खुदाई, प्रशासनिक मौन से बढ़ा विवाद

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जिले के मदनपुर गांव में तालाब निर्माण के नाम पर अवैध पत्थर खनन का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। लगातार दूसरे दिन भी गांव में बिना अनुमति के खुदाई और ढुलाई का काम जारी रहा। प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय लापरवाही के चलते गांव में खुलेआम तालाब गहरीकरण के नाम पर मुनाफाखोरी का खेल चल रहा है।स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत मदनपुर में तालाब की गहराई बढ़ाने के लिए खुदाई का कार्य बीते दो दिनों से जारी है। सरपंच का दावा है कि यह कार्य जल संरक्षण और तालाब विकास योजना के तहत कराया जा रहा है। लेकिन जब मीडिया टीम ने साइट पर पहुँचकर अनुमति संबंधी दस्तावेज मांगे, तो सरपंच और पंचायत प्रतिनिधि कोई भी स्पष्ट अनुमति पत्र या विभागीय स्वीकृति नहीं दिखा सके।

मौके से मिली फुटेज में स्पष्ट दिखाई देता है कि जेसीबी मशीनें लगातार पत्थर की खुदाई कर रही थीं, जबकि पास में खड़े ट्रैक्टर खुदाई किए गए पत्थरों को भरने की तैयारी में थे। मीडिया टीम की मौजूदगी का पता चलते ही ऑपरेटरों और ट्रैक्टर चालकों ने काम रोक दिया और मौके से भाग निकले।स्थानीय ग्रामीणों ने खुलासा किया कि तालाब निर्माण के नाम पर निकाले जा रहे पत्थरों को ट्रैक्टरों के माध्यम से गांव से बाहर भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रति ट्रिप ₹50 की दर से सौदे किए जा रहे हैं, जिससे सरपंच, पंच और ठेकेदार को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत की मिलीभगत से यह काम चल रहा है और अधिकारी इस पूरे मामले पर आंख मूंदे बैठे हैं।

गांव में न तो किसी विभागीय अधिकारी की मौजूदगी थी और न ही खनन अनुमति से जुड़ा कोई बोर्ड या नोटिस साइट पर प्रदर्शित किया गया था। यह स्थिति विभागीय नियंत्रण और निगरानी पर गंभीर सवाल उठाती है।विशेषज्ञों का कहना है कि तालाब निर्माण के नाम पर की जा रही यह अवैध खुदाई पर्यावरण और भू-स्तर दोनों के लिए नुकसानदेह है। पत्थरों के अत्यधिक दोहन से तालाब की प्राकृतिक संरचना प्रभावित होगी और भविष्य में जल संरक्षण की योजनाएँ विफल हो सकती हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अब भी हस्तक्षेप नहीं हुआ, तो पंचायत की विश्वसनीयता और गांव के प्राकृतिक संसाधन दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं, जहाँ तालाब निर्माण या विकास कार्य के नाम पर अवैध खनन और संसाधनों की लूट की गई है। लेकिन विभागीय निष्क्रियता के चलते अधिकांश प्रकरण कार्रवाई से पहले ही ठंडे बस्ते में चले जाते हैं।

अब देखना यह होगा कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में स्वतः संज्ञान लेकर जांच शुरू करता है, या मदनपुर का यह प्रकरण भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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