छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास के नाम पर हत्याएं: तंत्र-साधना और लालच ने छीनी कई जानें | 5 मामलों की पड़ताल

रायपुर
छत्तीसगढ़ में अंधविश्वास, तंत्र-साधना और तथाकथित सिद्धि पाने की चाह ने कई परिवारों को तबाह कर दिया है। शक्ति प्राप्त करने, धन लाभ और चमत्कार की उम्मीद में लोगों ने अपनों की ही हत्या तक कर डाली। यह रिपोर्ट ऐसे ही पांच गंभीर आपराधिक मामलों की पड़ताल करती है, जिनमें तंत्र-विद्या के नाम पर जघन्य अपराध किए गए।
इससे पहले प्रकाशित रिपोर्ट के पहले भाग में तंत्र-मंत्र के नाम पर हो रही हत्याओं के कारणों और उनके पैटर्न को उजागर किया गया था। इस दूसरे भाग में यह बताया जा रहा है कि किस तरह अंधविश्वास के जाल में फंसकर लोग अपने ही रिश्तों के खिलाफ अपराध की राह पर चले गए।
हर कहानी का एक जैसा सच
इन मामलों में एक समानता साफ दिखती है—
किसी को तांत्रिक बनने की चाह थी, किसी को गुरु की शक्ति पाने का भ्रम दिखाया गया, तो किसी को यह विश्वास दिलाया गया कि बलि या तांत्रिक क्रिया से धन और सफलता मिल सकती है।
पांच जिले, पांच घटनाएं
जशपुर, धमतरी, कोरबा, रायगढ़ और दुर्ग जिलों से सामने आए इन मामलों में आरोपियों ने तंत्र-साधना के नाम पर हत्या की।
कहीं मासूम बच्ची को बलि के नाम पर मारा गया।
कहीं शिष्य ने गुरु को मारकर उसकी शक्ति प्राप्त करने का भ्रम पाला।
कहीं बेटे ने अपनी मां की हत्या कर तांत्रिक क्रिया की।
कहीं पारिवारिक रिश्तों को ही साधना का माध्यम बना दिया गया।
इन घटनाओं में कई मामलों में अदालत ने दोषियों को कड़ी सजा भी सुनाई है।
योजनाबद्ध तरीके से दिए गए अपराध
जांच में सामने आया कि ये हत्याएं किसी तात्कालिक गुस्से का नतीजा नहीं थीं, बल्कि पहले से सोची-समझी योजना के तहत की गईं। तारीख, स्थान और कथित तांत्रिक प्रक्रिया पहले ही तय कर ली जाती थी। अपराध के बाद भी तंत्र-क्रियाएं की जाती थीं, जिससे साफ होता है कि आरोपियों का मानसिक स्तर लंबे समय से प्रभावित था।
विशेषज्ञों की चेतावनी
विशेषज्ञों का कहना है कि डर, लालच और अंधविश्वास के सहारे तांत्रिकों का एक नेटवर्क काम कर रहा है, जो लोगों को मानसिक रूप से कमजोर बनाकर अपराध के लिए उकसाता है। कई लोग बीमारी या परेशानी में डॉक्टर की जगह पहले बैगा या तांत्रिक के पास पहुंच जाते हैं, जिससे स्थिति और गंभीर हो जाती है।
क्या जरूरी है
अंधविश्वास से दूरी
वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा
किसी भी तरह के चमत्कार या बलि के दावे से सतर्क रहना
संदेह होने पर तुरंत प्रशासन और पुलिस को सूचना देना
यह रिपोर्ट समाज के लिए चेतावनी है कि अंधविश्वास केवल भ्रम नहीं, बल्कि कई बार जानलेवा भी साबित हो सकता है।




