डभरा में पारंपरिक सुआ नृत्य की धूम महिलाओं ने घर-घर जाकर जगाई लोक संस्कृति की चेतना

सक्ती
जिले के डभरा नगर में पारंपरिक छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य सुआ नृत्य की धूम इन दिनों चरम पर है। सारथी मोहल्ले की महिलाएं घर-घर जाकर इस लोकनृत्य के माध्यम से न सिर्फ आनंद बिखेर रही हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति को भी जीवंत कर रही हैं।

सक्ती जिले के नगर पंचायत डभरा के वार्ड क्रमांक 9, सारथी मोहल्ले में शनिवार को महिलाओं ने पारंपरिक सुआ नृत्य का आयोजन किया। यह नृत्य छत्तीसगढ़ की लोकपरंपरा का एक अहम हिस्सा है, जिसमें महिलाएं बांस की टोकरी में सुआ की मूर्ति रखकर उसके चारों ओर घेरा बनाती हैं और प्रेम, वियोग तथा फसल से जुड़े गीतों के साथ नृत्य करती हैं।
इस दौरान महिलाएं घर-घर जाकर गीतों की मधुर धुन पर झूमती नजर आईं। कहा जाता है कि यह नृत्य समृद्धि, सौभाग्य और सामूहिक एकता का प्रतीक है।
सुआ नृत्य के बाद पारंपरिक गौरा-गौरी पूजा की तैयारियां भी जोर-शोर से की जा रही हैं। महिलाओं ने बताया कि आने वाले दिनों में मोहल्ले में गौरा-गौरी का पूजन बड़े उत्साह और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ किया जाएगा।
सूअर नित्य पर्व की परंपरा और महत्व
छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं में अनेक ऐसे उत्सव हैं जो ग्रामीण संस्कृति और मान्यताओं से गहराई से जुड़े हैं। इन्हीं में से एक है “सूअर नित्य” — एक परंपरागत आयोजन जो कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में मनाया जाता है।कहा जाता है कि यह पर्व कृषि कार्यों की समाप्ति और समृद्धि की कामना से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसे देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने और पशुधन की सुरक्षा व वृद्धि की प्रार्थना के रूप में मनाया जाता है।इस दिन गांवों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। सूअर (वराह रूप) को भगवान विष्णु का प्रतीक मानकर पूजा जाता है, क्योंकि धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु ने वराह अवतार लेकर पृथ्वी को पाताल से उठाया था।इसी वजह से इस पर्व को “सूअर नित्य” कहा जाता है, यानी वराह नृत्य या उत्सव, जो धरती माता के पुनरुत्थान और खुशहाली का प्रतीक है।कई जगहों पर लोकगीत, नृत्य और सामूहिक भोज का आयोजन भी होता है, जिसमें पूरे गांव के लोग मिलकर भाग लेते हैं।इस तरह “सूअर नित्य” केवल धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि लोक एकता, आस्था और परंपरा का जीवंत प्रतीक बन गया है।“सूअर नित्य” हमें यह संदेश देता है कि प्रकृति, पशुधन और परिश्रम — यही ग्रामीण जीवन की असली शक्ति हैं




