“मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण ( एसआईआर )– लोकतंत्र की नींव को सुदृढ़ करने की पहल”

भारत में लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत उसका मतदाता है। यही वह शक्ति है जो सरकारों को जन्म देती है, व्यवस्था को दिशा देती है और देश की नीतियों का भविष्य तय करती है। ऐसे में यह स्वाभाविक है कि मतदाता सूची — यानी “वोटर लिस्ट” — का शुद्ध और अद्यतन होना लोकतंत्र की बुनियादी ज़रूरत है। इसी उद्देश्य से चुनाव आयोग ने पूरे देश में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) अभियान आरंभ किया है।
इस अभियान के तहत प्रत्येक मतदान केंद्र पर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन कर रहे हैं। जिनका नाम सूची में नहीं है, उन्हें जोड़ा जा रहा है और जो मृतक हैं या स्थानांतरित हो चुके हैं, उनके नाम हटाए जा रहे हैं। साथ ही पहली बार वोट देने वाले युवाओं के नाम दर्ज कराए जा रहे हैं। यह प्रक्रिया केवल एक तकनीकी औपचारिकता नहीं, बल्कि लोकतंत्र के स्वास्थ्य की जाँच है।
हालाँकि, इस पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान कुछ चुनौतियाँ भी सामने आ रही हैं। कई जगहों पर वैध मतदाताओं के नाम गलती से हटने की शिकायतें आई हैं। पहचान पत्र या दस्तावेज़ों की कमी के कारण ग्रामीण और अशिक्षित वर्गों को कठिनाई हो रही है। इसके अलावा, कुछ राज्यों में इस प्रक्रिया के राजनीतिक दुरुपयोग के आरोप भी उठे हैं। ऐसे में ज़रूरी है कि इस अभियान को पूरी पारदर्शिता, संवेदनशीलता और निगरानी के साथ चलाया जाए।
चुनाव आयोग को चाहिए कि हर नागरिक को जानकारी मिले कि वह अपने नाम की स्थिति ऑनलाइन कैसे देख सकता है, सुधार कैसे कर सकता है और शिकायत कहाँ दर्ज कर सकता है। स्थानीय प्रशासन, समाजसेवी संस्थाएँ और मीडिया भी इस कार्य में सहयोग दें — ताकि किसी का मताधिकार छिन न जाए और हर पात्र नागरिक का नाम सूची में रहे।
गौर करने योग्य है कि सही मतदाता सूची ही निष्पक्ष चुनाव की गारंटी है। अगर सूची में गड़बड़ी है, तो लोकतंत्र की पूरी प्रक्रिया संदिग्ध हो जाती है। इसलिए इस विशेष पुनरीक्षण को केवल सरकारी प्रक्रिया न समझा जाए — यह हर नागरिक की भागीदारी का पर्व है।
निष्कर्षतः, मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण केवल नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह लोकतंत्र की आत्मा को शुद्ध करने का प्रयास है। आवश्यक है कि नागरिक भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लें, अपने परिवार और पड़ोसियों को जागरूक करें। तभी यह अभियान सफल होगा और लोकतंत्र की नींव और भी मज़बूत होगी।




