छत्तीसगढ़

जांजगीर-चांपा में कृषि उप संचालक पर महिला अधिकारी ने लगाया मानसिक प्रताड़ना का आरोप — कलेक्टर ने जांच के दिए निर्देश

लोकेशन – जांजगीर-चांपा
रिपोर्टर – दीपक यादव
दिनांक – 12 नवंबर 2025

जांजगीर-चांपा जिले के कृषि विभाग में एक गंभीर मामला सामने आया है।
यहां विभाग की महिला ग्रामीण विस्तार अधिकारी (REO) ने उप संचालक ललित मोहन भगत पर मानसिक प्रताड़ना और पद का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है।
महिला अधिकारी ने कलेक्टर को शिकायत पत्र सौंपते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारी पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, अकलतरा विकासखंड में पदस्थ महिला ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी ने बताया कि कृषि उप संचालक ललित मोहन भगत द्वारा बार-बार उसका वेतन रोककर दबाव बनाया जाता था।
जब महिला अधिकारी ने वेतन रोकने का कारण पूछा तो उप संचालक द्वारा उसे अपने शासकीय आवास बुलाने की कोशिश की गई।
महिला ने आरोप लगाया कि जब उसने इस मामले की शिकायत कृषि विभाग के निदेशक और महिला आयोग में की, तो उसके बाद उप संचालक ने और अधिक मानसिक प्रताड़ना शुरू कर दी।
यहां तक कि विभागीय ग्रुप में भी उसके खिलाफ गलत टिप्पणियाँ और अपमानजनक बातें फैलाकर उसे बदनाम करने का प्रयास किया गया।

महिला अधिकारी ने बताया कि उसके पिता का निधन हो चुका है और वह अपनी बीमार माँ की अकेले देखभाल करती है।
ऐसे में तत्कालीन उप संचालक ने उसकी पारिवारिक स्थिति को देखते हुए बलौदा ब्लॉक से अकलतरा ब्लॉक में प्रतिनियुक्ति दी थी, जिसके लिए डिपार्टमेंट की स्वीकृति भी ली गई थी।
लेकिन वर्तमान उप संचालक ने उस आदेश को ही गलत ठहराते हुए महिला अधिकारी पर बलौदा ब्लॉक में पुनः जॉइन करने का दबाव बनाया।
विरोध करने पर उसे अपने निवास बुलाने की बात कही गई और जब उसने ऐसा करने से इंकार किया तो उसका वेतन रोक दिया गया।
कलेक्टर के हस्तक्षेप के बाद भले ही वेतन जारी कर दिया गया, लेकिन मानसिक प्रताड़ना जारी रही।

महिला अधिकारी की शिकायत को कलेक्टर जन्मेजय महोबे ने गंभीरता से लिया है।
कलेक्टर ने कहा कि महिला कर्मचारी के साथ किसी भी प्रकार की प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने महिला अधिकारियों की एक जांच टीम गठित करने के निर्देश दिए हैं और कहा है कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

(जन्मेजय महोबे, कलेक्टर, जांजगीर-चांपा)

“शिकायत मिली है।
महिला कर्मचारी की सुरक्षा और सम्मान हमारी प्राथमिकता है।
महिला अधिकारियों की एक जांच समिति गठित कर दी गई है, जो तथ्यों की जांच कर रिपोर्ट देगी।
रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।”

महिला अधिकारी ने बताया कि उसने अपने संगठन से भी मदद की गुहार लगाई, लेकिन संगठन के कुछ पदाधिकारियों ने ऊपरी दबाव का हवाला देते हुए उसका साथ देने से इंकार कर दिया।
अब महिला अधिकारी ने अपने ऊपर हुए अन्याय के खिलाफ अकेले ही लड़ने का निर्णय लिया है।
वह कहती हैं कि जब तक उसे न्याय नहीं मिलेगा, वह अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।

महिला कर्मचारी की इस शिकायत ने कृषि विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक व्यवहार पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यह देखना होगा कि जांच में क्या सच्चाई सामने आती है और क्या पीड़ित महिला को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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