जशपुर जिले में पत्रकारों ने किया जनसम्पर्क ग्रुप का बहिष्कार, दर्जनों से अधिक पत्रकार हुए स्वयं ग्रुप से बाहर

जशपुर
जशपुर जिले से बड़ी खबर है जहां पत्रकारों और प्रशासन के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आया है। जिले भर के पत्रकारों ने आज कुनकुरी में आपात बैठक कर प्रशासन के रवैए पर कड़ा विरोध जताया है। मामला पत्रकार मुकेश नायक और उनके बच्चे के शव को लेकर विवाद शुरू हुआ।
दरअसल, पत्रकार मुकेश नायक अपने बच्चे के शव को उड़ीसा के सुंदरगढ़ अस्पताल से घर ला रहे थे। लेकिन छत्तीसगढ़ सीमा पर उड़ीसा के शव वाहन चालक ने राज्य में प्रवेश करने से मना कर दिया। करीब दो घंटे तक जिले में शव वाहन की व्यवस्था नहीं मिल सकी… और मजबूरी में मुकेश नायक को अपने बच्चे का शव स्कूटी से ही घर लाना पड़ा। घटना सामने आने के बाद पत्रकारों ने इसे खबर के रूप में प्रकाशित किया। इसी दौरान विवाद तब बढ़ा, जब जनसम्पर्क ग्रुप में अधिकारी द्वारा की गई चैट का स्क्रीनशॉट वायरल हो गया, जिसमें CPR में रिपोर्ट भेजने की बात कही गई थी।
इसके बाद जिले के पत्रकारों ने कुनकुरी में आपातकालीन बैठक कर विरोध जताया और दर्जनों पत्रकारों ने जनसंपर्क ग्रुप से खुद को बाहर कर लिया। पत्रकारों का आरोप है कि प्रशासन जनसंपर्क ग्रुप के जरिए मीडिया पर नियंत्रण और दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है।

आपको बता दें, यह पहला मामला नहीं है। बीते 10 सितंबर 2025 को भी इसी तरह दबाव का मुद्दा उठा था, जब वर्तमान जनसंपर्क अधिकारी नूतन सिदार ने रायगढ़ जिले से एक और जशपुर जिले के 08 लोकल पत्रकारों को एक–एक करोड़ का मानहानि का नोटिस भेज दिया है। उस मामले की भी तस्वीरें और चैट सोशल मीडिया में वायरल हुई थीं, जिसमें राज्य भर के पत्रकारों ने जशपुर में रैली निकाली थी और कार्यवाही की मांग करते हुए मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा था।
उस मामले में पीड़ित कर्मचारी रविन्द्र राम ने आरोप लगाया था कि जनसंपर्क कार्यालय अधिकारी द्वारा प्रताड़ना से तंग आकर उसने जहर खाया था, लेकिन आज तक प्रशासन ने ठोस कार्रवाई नहीं की।
फिलहाल, दर्जनों पत्रकारों का जनसंपर्क ग्रुप से बाहर होना, प्रशासन के कामकाज पर बड़ा सवाल खड़ा करता है… और जिले में पत्रकार–प्रशासन के संबंधों को लेकर एक नई बहस शुरू हो गई है।




