कोरबा में 108 एम्बुलेंस सेवा वेंटिलेटर पर, सिस्टम की लापरवाही से 3 घंटे तड़पता रहा घायल मरीज

रिपोर्टर – सरोज रात्रे
लोकेशन – कोरबा | छत्तीसगढ़
कोरबा जिले में जिस 108 संजीवनी एम्बुलेंस सेवा को आम लोगों की “जीवन रेखा” कहा जाता है, वही सेवा आज खुद वेंटिलेटर पर नजर आ रही है।
ताज़ा मामला पोड़ी उपरोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से सामने आया है, जहां मंगलवार शाम एक सड़क दुर्घटना में घायल मरीज को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिल सकी।
शाम 7 बजे से लेकर रात 10 बजे तक — पूरे तीन घंटे तक मरीज दर्द से कराहता रहा। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उसे हायर सेंटर कटघोरा रेफर किया, लेकिन न तो 108 एम्बुलेंस मौके पर पहुंची और न ही सिस्टम ने कोई जवाबदेही दिखाई।
सबसे चौंकाने वाली बात ये रही कि 108 का संपर्क नंबर लगातार “बिजी” बताता रहा, जबकि जांच में सामने आया कि रात 8 बजकर 13 मिनट पर एम्बुलेंस जटगा में खड़ी थी। इसके बावजूद कॉल पर “केस में बिजी” होने का बहाना चलता रहा।
सूत्रों की मानें तो कोरबा जिले में फिलहाल सिर्फ 4 ही 108 एम्बुलेंस चालू हालत में हैं, जबकि बाकी वाहन खराब पड़े हुए हैं। यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में आपात स्थिति में मरीजों को समय पर मदद नहीं मिल पा रही।

अब सवाल सीधे सिस्टम से हैं—
जब एम्बुलेंस खड़ी थी, तो मरीज तक क्यों नहीं पहुंची?
किसके इशारे पर झूठी व्यस्तता दिखाई गई?
और क्या ग्रामीण मरीजों की जान की कोई कीमत नहीं?
स्थानीय लोगों ने पूरे मामले को घोर लापरवाही और अमानवीय रवैया बताते हुए जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त जांच और कार्रवाई की मांग की है।
सवाल बड़ा है—
क्या 108 एम्बुलेंस सिर्फ फाइलों और कागज़ों में दौड़ रही है?
और क्या सिस्टम की नींद टूटने से पहले किसी की जान जाएगी?




