भारत-रूस कनेक्टिविटी गठबंधन और मजबूत: आर्कटिक रूट से लेकर चेन्नई-व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर तक बड़े समझौते

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने परिवहन, समुद्री सुरक्षा और कनेक्टिविटी को नई गति देने वाले कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए। नई दिल्ली में आयोजित 23वें भारत-रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों देशों ने कनेक्टिविटी सेक्टर को भविष्य की रणनीतिक साझेदारी का केंद्र बताया।
भारत और रूस ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य एक ऐसा स्थिर, कुशल और बहु-स्तरीय परिवहन तंत्र तैयार करना है, जो यूरेशिया के बड़े हिस्से में व्यापार और सामरिक गतिविधियों का नया आधार बने।
INSCTC, चेन्नई–व्लादिवोस्तोक कॉरिडोर और आर्कटिक रूट होंगे साझेदारी के तीन मुख्य स्तंभ
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों देशों ने इन महत्वपूर्ण गलियारों को तेज गति से आगे बढ़ाने पर सहमति जताई—
अंतरराष्ट्रीय उत्तर–दक्षिण परिवहन गलियारा (INSCTC)
चेन्नई–व्लादिवोस्तोक (ईस्टर्न मैरिटाइम कॉरिडोर)
उत्तरी सागर मार्ग (Northern Sea Route)
ये तीनों कॉरिडोर भारत के समुद्री व्यापार के भविष्य को आकार देंगे—विशेषकर मध्य एशिया, आर्कटिक और पूर्वी रूस तक पहुँच के लिहाज से।
चाबहार पोर्ट बना रणनीतिक केंद्र—मध्य एशिया तक भारत का ‘गेटवे’
भारत ने दोहराया कि ईरान का चाबहार बंदरगाह न सिर्फ व्यापार का महत्वपूर्ण माध्यम है, बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी उसे अत्यंत अहम माना जा रहा है।
यह बंदरगाह INSCTC का केंद्रीय हिस्सा है और भारत-रूस कनेक्टिविटी रणनीति में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
ध्रुवीय जल में जहाज संचालन के लिए भारत-रूस समझौता—भारतीय नाविकों का होगा स्पेशल प्रशिक्षण
दोनों देशों ने दो अहम MoU पर भी हस्ताक्षर किए—
पायलटों और नाविकों को आर्कटिक व पोलर वॉटर में प्रशिक्षण
भारत के पोत परिवहन मंत्रालय और रूस के परिवहन मंत्रालय के बीच हुए समझौते के तहत भारतीय नाविकों को ध्रुवीय इलाकों में जहाज संचालन का प्रशिक्षण रूस के विशेषज्ञ संस्थान देंगे।
समुद्री क्षेत्र में अनुसंधान, बंदरगाह विकास, खनिज खोज और R&D सहयोग
दूसरे समझौते के जरिए निम्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा—
पोर्ट ऑपरेशन
जहाज निर्माण
समुद्री खनिजों की खोज
समुद्री अनुसंधान एवं विकास
लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाना
रूस-भारत रेल सहयोग भी मजबूत—टेक्नोलॉजी ट्रांसफर पर जोर
संयुक्त बयान के अनुसार, भारतीय रेल और रूस की रेलवे एजेंसियों के बीच लंबे समय से चल रहा तकनीकी सहयोग सफल रहा है। दोनों देश अब इसे नए चरण में ले जाएंगे, ताकि—
नई तकनीक
फ्लीट मैनेजमेंट
सिग्नलिंग सिस्टम
डिजिटल रेलवे समाधान
का आदान-प्रदान तेज़ी से हो सके।
उत्तरी सागर मार्ग बना भारत का नया सामरिक फोकस
भारत और रूस ने माना कि आर्कटिक क्षेत्र भविष्य में ऊर्जा, खनिज और समुद्री व्यापार का बड़ा केंद्र बनने वाला है।
भारत ने आर्कटिक काउंसिल में एक सक्रिय पर्यवेक्षक के रूप में भूमिका निभाने की इच्छा व्यक्त की है, जबकि रूस ने मार्च 2025 में मुरमान्स्क में होने वाले 6वें इंटरनेशनल आर्कटिक फोरम में भारत की भागीदारी की सराहना की।




