भारत 2028 में लॉन्च करेगा Chandrayaan-4: चांद से सैंपल लाने वाला देश का सबसे कठिन मिशन, ISRO के बड़े प्लान का खुलासा

भारत 2028 में लॉन्च करेगा Chandrayaan-4: चांद से सैंपल लाने वाला देश का सबसे कठिन मिशन, ISRO के बड़े प्लान का खुलासा
भारत आने वाले वर्षों में अंतरिक्ष विज्ञान में एक नई छलांग लगाने की तैयारी कर रहा है। ISRO ने आधिकारिक रूप से पुष्टि की है कि देश का अगला और अब तक का सबसे जटिल चंद्र मिशन चंद्रयान-4 वर्ष 2028 में लॉन्च किया जाएगा। इस मिशन का लक्ष्य होगा — चांद की सतह से सैंपल लाकर पृथ्वी पर पहुंचाना, जो किसी भी मिशन की तकनीकी दृष्टि से सबसे चुनौतीपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
ISRO के चेयरमैन वी. नारायणन ने बताया कि केंद्र सरकार ने मिशन को पूर्ण स्वीकृति दे दी है और इसे भारत के महत्वाकांक्षी लूनर प्रोग्राम का सबसे बड़ा अध्याय बताया जा रहा है।
चंद्रयान-4: सैंपल रिटर्न मिशन, जिसे अब तक सिर्फ 3 देश कर पाए
चांद से मिट्टी या चट्टान के सैंपल वापस लाने की क्षमता अभी तक
🇺🇸 अमेरिका
🇨🇳 चीन
🇷🇺 रूस
ने ही दिखाई है।
भारत इस सूची में शामिल होने वाला चौथा देश बन सकता है।
नारायणन ने बताया कि यह मिशन बेहद जटिल तकनीकों से लैस होगा, क्योंकि—
सैंपल को चंद्रमा की सतह से इकट्ठा करना
मॉड्यूल को वापस भेजना
पृथ्वी के वातावरण में सुरक्षित लैंडिंग कराना
तीनों ही प्रक्रियाएं उच्च तकनीकी चुनौतियों से भरी होंगी।
ISRO इस साल 7 बड़े लॉन्च भी करेगा
ISRO प्रमुख ने यह भी पुष्टि की कि इस वित्त वर्ष में संगठन
7 और बड़े मिशन
कमर्शियल कम्युनिकेशन सैटेलाइट
PSLV और GSLV लॉन्च
पूरा करने जा रहा है।
यह लॉन्च भारत की स्पेस इंडस्ट्री को और मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
LUPEX मिशन—JAXA के साथ चांद के दक्षिणी ध्रुव का अध्ययन
भारत और जापान मिलकर LUPEX (Lunar Polar Exploration Mission) मिशन पर काम कर रहे हैं।
इसका उद्देश्य होगा—
चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर मौजूद वॉटर आइस का अध्ययन
भविष्य के चांद पर टिकाऊ मिशनों के लिए डेटा संग्रह
LUPEX को आने वाले वर्षों में भारत की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय स्पेस साझेदारी कहा जा रहा है।
तीन साल में ISRO तिगुना करेगा स्पेसक्राफ्ट प्रोडक्शन
ISRO अगले तीन वर्षों में स्पेसक्राफ्ट निर्माण क्षमता को 3 गुना बढ़ाने की योजना बना रहा है।
इसका सीधा फायदा—
तेजी से मिशन तैयार करने
कमर्शियल लॉन्च बढ़ाने
निजी स्पेस सेक्टर को बढ़ावा
में मिलेगा।
गगनयान मिशन—सुरक्षित लैंडिंग का सफल टेस्ट पूरा
भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान के लिए ISRO ने
इंटीग्रेटेड मेन पैराशूट एयरड्रॉप टेस्ट (IMAT)
सफलतापूर्वक पूरा किया।
इस टेस्ट में—
इंडियन एयरफोर्स के IL-76 एयरक्राफ्ट से
2.5 टन वजनी क्रू मॉड्यूल
2.5 किमी ऊंचाई से गिराया गया
और पैराशूट सिस्टम ने बिना किसी समस्या के क्राफ्ट को नियंत्रित तरीके से नीचे उतारा।
इससे यह साबित हो गया कि
वास्तविक मिशन में भी पैराशूट सिस्टम कठिन परिस्थितियों में काम कर सकेगा।
इससे पहले बंगाल की खाड़ी में चिनूक हेलीकॉप्टर से एयरड्रॉप टेस्ट पूरा किया जा चुका है।
भारत के आगामी स्पेस मिशन इस दशक को ऐतिहासिक बनायेंगे
2028 का चंद्रयान-4,
LUPEX,
गगनयान
और तेज होती लॉन्च क्षमता—
भारत को न सिर्फ अंतरिक्ष विज्ञान में अग्रणी बनाएगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर स्पेस सुपरपावर बनाने की दिशा में निर्णायक कदम सिद्ध होगी।




