अंतर्राष्ट्रीय

भारत का रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर, निर्यात में भी नई ऊंचाई

भारत ने रक्षा स्वदेशीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की है। वित्त वर्ष 2024–25 में देश का रक्षा उत्पादन पहली बार 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। सरकार का अनुमान है कि यह आंकड़ा वर्ष के अंत तक 1.75 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है। यह वृद्धि आत्मनिर्भर भारत अभियान की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

रक्षा क्षेत्र की प्रगति

2014–15 में 46,429 करोड़ रुपये का उत्पादन आज कई गुना बढ़ चुका है। भारत ने वर्ष 2029 तक रक्षा उत्पादन को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP 2020) और रक्षा खरीद नियमावली (DPM 2025) के कारण खरीद प्रणाली तेज और पारदर्शी हुई है। वर्तमान में 65 प्रतिशत से अधिक रक्षा उपकरण देश में निर्मित हो रहे हैं।

रक्षा निर्यात में ऐतिहासिक उछाल

वित्त वर्ष 2024–25 में भारत का रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो अब तक का सर्वाधिक स्तर है। वर्ष 2014 में यह आंकड़ा 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था। भारत अब 100 से अधिक देशों को रक्षा उत्पाद निर्यात करता है। सरकार ने 2029 तक निर्यात को 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।

रक्षा उद्योग का विस्तार

उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक गलियारों में 9,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश दर्ज किया गया है। करीब 16,000 MSME और कई स्टार्टअप रक्षा विनिर्माण में शामिल होकर स्वदेशीकरण को गति दे रहे हैं।

चुनौतियाँ

भारत को उच्च-स्तरीय तकनीक, R&D में कम निवेश, विदेशी उपकरणों की प्राथमिकता, और DPSU की धीमी उत्पादन प्रणाली जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जेट इंजन, सेंसर और उन्नत मिसाइल तकनीक जैसे क्षेत्रों में अभी भी विदेशी कंपनियों पर निर्भरता बनी हुई है।

आगे की दिशा

विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक तकनीकी रोडमैप, DARPA मॉडल पर स्वतंत्र तकनीकी एजेंसी की स्थापना, R&D में निवेश बढ़ाने, और निजी क्षेत्र को अधिक अवसर देने से स्वदेशीकरण को और तेज गति मिल सकती है।

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