जांजगीर-चांपा

महिला एवं बाल सशक्तिकरण में जांजगीर-चांपा ने रचा नया इतिहास — 25 वर्षों में बाल विवाह रोकथाम, पोषण और संरक्षण में हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धियां

जांजगीर-चांपा
छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के बाद से पिछले 25 वर्षों में महिला एवं बाल विकास विभाग ने जिले में समाज के सर्वांगीण विकास की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, पोषण, महिला सशक्तिकरण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में जांजगीर-चांपा जिला आज राज्यभर में एक मिसाल बन चुका है।

पोषण और आईसीडीएस सेवाओं का विस्तार

वर्ष 2000 में जिले में 981 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित थे, जो बढ़कर वर्ष 2025 में 1369 हो गए हैं।
इन केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, बच्चों और माताओं को पोषण, स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और परामर्श सेवाएँ लगातार प्रदान की जा रही हैं।
इन प्रयासों से कुपोषण की दर घटकर अब 8.89 प्रतिशत पर आ गई है — जो प्रदेश में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

मातृ एवं शिशु के समग्र विकास की दिशा में कदम

प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के तहत वर्ष 2017 से अब तक 21,483 से अधिक गर्भवती महिलाएँ लाभान्वित हुई हैं।
इसके अलावा, मार्च 2024 से शुरू महतारी वंदन योजना के तहत 2,83,704 महिलाएँ लाभ प्राप्त कर रही हैं।
इन योजनाओं ने मातृ स्वास्थ्य और नवजात शिशुओं के पोषण में उल्लेखनीय सुधार किया है, जिससे मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी आई है।

नारी सशक्तिकरण और बाल विवाह रोकथाम

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत वर्ष 2024-25 में 180 जोड़ों को और वर्ष 2025 में अब तक 75 जोड़ों को लाभ मिला है।
महिलाओं की सुरक्षा और सहायता हेतु जिले में सखी वन स्टॉप सेंटर, महिला हेल्पलाइन (181) और महिला थाने स्थापित किए गए हैं।

वर्तमान में 780 महिला स्व-सहायता समूह पूरक पोषण आहार कार्यक्रम का संचालन कर रहे हैं, जिससे महिलाओं को आर्थिक आत्मनिर्भरता का अवसर मिला है।

बाल संरक्षण एवं पुनर्वास

मिशन वात्सल्य, बाल कल्याण समिति, चाइल्ड लाइन और जेजे एक्ट के तहत बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
सत्र 2024-25 में कुल 40 बाल विवाह रोके गए — जो सामाजिक जागरूकता और प्रशासनिक तत्परता का परिणाम है।

अब तक समिति द्वारा 3338 मामलों पर विचार कर 3276 बच्चों को परिवार में पुनर्वासित किया गया है, जबकि 62 बच्चों को संस्थागत संरक्षण प्रदान किया गया है।
पोषण देखरेख में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जांजगीर-चांपा राज्य में प्रथम स्थान पर रहा है।
स्पॉन्सरशिप योजना के अंतर्गत 100 बच्चों को आर्थिक सहायता दी जा रही है।

रजत महोत्सव के तहत विशेष आयोजन

जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती अनीता अग्रवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ रजत महोत्सव के अवसर पर विभाग द्वारा विभिन्न सामुदायिक कार्यक्रम, जनजागरूकता रैलियाँ, कार्यशालाएँ और संगोष्ठियाँ आयोजित की जा रही हैं।
अब तक 1330 से अधिक गतिविधियों की जानकारी विभागीय पोर्टल पर दर्ज की जा चुकी है।

सशक्त नारी – स्वस्थ बालक – समृद्ध समाज

महिला एवं बाल विकास विभाग की यह 25 वर्षीय यात्रा सेवा, समर्पण और सशक्तिकरण की कहानी कहती है।
जांजगीर-चांपा जिले ने बाल विवाह रोकथाम, पोषण सशक्तिकरण और बाल संरक्षण के क्षेत्र में राज्य में अग्रणी स्थान हासिल कर यह साबित किया है कि जब शासन, प्रशासन और समाज एक साथ काम करते हैं, तो बदलाव निश्चित होता है।

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