भारत में तेजी से बढ़ रहे किडनी रोग, 40% मरीज समय पर जांच न होने से गंभीर स्थिति में पहुंचते

नई दिल्ली।
देश में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। विशेषज्ञों के अनुसार हर साल लाखों लोग किडनी कमजोर होने, संक्रमण, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ के कारण नेफ्रोलॉजिस्ट के पास पहुँचते हैं। चिंता की बात यह है कि लगभग 40 प्रतिशत मरीज लक्षणों की अनदेखी और समय पर जांच न कर पाने की वजह से अंतिम चरण में अस्पताल पहुंचते हैं।
युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा
पहले किडनी रोग को बुज़ुर्गों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब 25 से 40 साल की आयु में भी लगातार मामले बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि
फास्ट फूड,
पानी कम पीना,
अधिक नमक वाले भोजन,
देर तक बैठने की आदत
युवाओं की किडनी पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाल रही हैं।
शुरुआती लक्षण जिन्हें लोग नजरअंदाज़ करते हैं
डॉक्टर्स के मुताबिक किडनी के खराब होने के संकेत बहुत सूक्ष्म होते हैं, जिन्हें अक्सर आम थकान समझकर टाल दिया जाता है।
इन लक्षणों को गलत न समझें:
पैरों और चेहरे में सूजन
बार-बार यूरिन जाना
यूरिन का झागदार होना
शरीर में लगातार कमजोरी
भूख कम लगना
आंखों के नीचे काले घेरे
समय रहते जांच न हो तो किडनी डैमेज स्थायी भी हो सकता है।
डायबिटीज़ और हाई BP–सबसे बड़े कारण
देश में तेजी से बढ़ रही डायबिटीज़ और हाई ब्लड प्रेशर किडनी फेलियर के प्रमुख कारण हैं। भारत में हर तीसरा डायबिटीज़ मरीज किडनी संबंधी जटिलताओं के जोखिम में रहता है।
डॉक्टर्स का कहना है कि शुगर और BP का अनियंत्रित रहना किडनी की रक्त नलिकाओं को धीरे-धीरे खराब कर देता है।
उपचार से ज्यादा जरूरी बचाव
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि:
दिनभर में 2.5–3 लीटर पानी पिएं
नमक का सेवन कम रखें
नियमित BP और शुगर जांच कराते रहें
ज्यादा दर्द निवारक दवाइयों का सेवन न करें
संतुलित भोजन और नियमित व्यायाम करें
साल में एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट जरूर कराएं
सरकार और अस्पतालों की पहल
कई राज्य सरकारें अब ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में किडनी स्क्रीनिंग कैंप चला रही हैं। नेशनल हेल्थ मिशन के तहत डायबिटीज़ और हाई BP के मरीजों की विशेष निगरानी की जा रही है ताकि बीमारी प्रारंभिक अवस्था में ही पकड़ी जा सके।




