धान छोड़ सब्ज़ी की राह: ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान राजु मधुकर की आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी

रिपोर्टर: दीपक यादव
सक्ती
कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो के निर्देशानुसार सक्ती जिले में किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित जनकल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसी क्रम में उद्यानिकी विभाग की योजनाएं किसानों के लिए आर्थिक उन्नति का मजबूत आधार बनकर सामने आ रही हैं। इसका सशक्त उदाहरण विकासखंड मालखरौदा अंतर्गत ग्राम छोटे रबेली निवासी किसान श्री राजु मधुकर हैं, जिन्होंने परंपरागत धान की खेती को छोड़ आधुनिक तकनीक से ग्राफ्टेड बैंगन की खेती अपनाकर अपनी आय में कई गुना बढ़ोतरी की है।
श्री राजु मधुकर लंबे समय से लगभग 5 एकड़ भूमि में धान की खेती कर रहे थे। बढ़ती लागत, सीमित उत्पादन और बाजार जोखिम के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। धान की खेती से उन्हें औसतन 105 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिस पर करीब ₹1 लाख 10 हजार की लागत आती थी। बाजार में बिक्री से लगभग ₹3 लाख 15 हजार की आमदनी होती थी, लेकिन लागत घटाने के बाद शुद्ध आय मात्र ₹2 लाख 05 हजार रह जाती थी, जो परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
वर्ष 2024–25 में उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग से उन्होंने खेती में नवाचार का निर्णय लिया। विभाग द्वारा ग्राफ्टेड बैंगन की उन्नत किस्म, वैज्ञानिक खेती पद्धति, पौध रोपण, सिंचाई और कीट-रोग प्रबंधन की जानकारी दी गई। आधुनिक तकनीक और उन्नत पौध सामग्री के उपयोग से फसल का उत्पादन उल्लेखनीय रूप से बढ़ा।
उसी 5 एकड़ भूमि में ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से श्री मधुकर को लगभग 600 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। इस फसल पर कुल लागत करीब ₹3 लाख 50 हजार आई, जबकि बाजार में विक्रय से उन्हें लगभग ₹10 लाख 80 हजार की आमदनी हुई। इस प्रकार ग्राफ्टेड बैंगन की खेती से किसान को करीब ₹7 लाख 30 हजार की शुद्ध आय प्राप्त हुई, जो परंपरागत धान की खेती की तुलना में कई गुना अधिक है।
इस बदलाव से न केवल किसान की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई, बल्कि उन्हें खेती से स्थायी रोजगार भी मिला। फसल की देखरेख, तुड़ाई और विपणन के दौरान अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। आज श्री राजु मधुकर की यह सफलता आसपास के गांवों के किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है, और कई किसान उद्यानिकी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं।
किसान श्री राजु मधुकर ने अपनी इस सफलता का श्रेय शासन-प्रशासन एवं उद्यानिकी विभाग को देते हुए कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो और विभागीय अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनकी कहानी इस बात का प्रमाण है कि यदि किसान सरकारी योजनाओं का सही लाभ लें और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाएं, तो खेती को लाभ का व्यवसाय बनाकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया जा सकता है।




