
लोकेशन -देवसागर, छत्तीसगढ़/रिपोर्टर -कमलेश पटेल
छत्तीसगढ़ के देवसागर में चैत्र पूर्णिमा और हनुमान जयंती के मौके पर आस्था का विशाल सैलाब उमड़ने वाला है…
नगर भटगांव से महज 3 किलोमीटर दूर स्थित मां हिंगलाज के दरबार में आज एक दिवसीय भव्य मेले का आयोजन होगा…
मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है… यही वजह है कि सुबह 5 बजे से रात 8:30 बजे तक लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं…



मां हिंगलाज के दरबार में दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु नारियल और नींबू चढ़ाकर अपनी मन्नत मांगते हैं…
मंदिर में चढ़ी हल्दी को प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है…
खास परंपरा के तहत कई श्रद्धालु जमीन पर लेटकर ‘लोट मारते’ हुए मंदिर तक पहुंचते हैं…
मान्यता है कि संतान सुख और रोग मुक्ति के लिए मां से मांगी गई मन्नत जरूर पूरी होती है…
मंदिर परिसर के आसपास भैरव नाथ, बजरंग बली, राधा-कृष्ण और महादेव समेत कई देवी-देवताओं के मंदिर बने हुए हैं…
शाम होते ही पहाड़ियों की खूबसूरती और आस्था का माहौल और भी बढ़ जाता है…
श्रद्धालु यहां दर्शन के साथ-साथ प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेते हैं…
देवसागर की पहाड़ियों के बीच स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी आस्था के साथ-साथ रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है…
कहा जाता है कि रात 9 बजे के बाद कोई भी व्यक्ति मंदिर परिसर में नहीं रुकता…
स्थानीय मान्यता है कि उस रात माता स्वयं क्षेत्र में भ्रमण करती हैं…
मां हिंगलाज मंदिर की पूजा परंपरा पीढ़ियों से भटगांव जमींदार परिवार निभाता आ रहा है…
अंतिम जमींदार प्रेम भुवन प्रताप सिंह के बाद उनके परिवार ने दशकों तक पूजा-अर्चना की परंपरा को आगे बढ़ाया…
वर्तमान में पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह इस परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं…
मंदिर का इतिहास सारंगढ़ राजघराने और भटगांव जमींदार से जुड़ा हुआ है…
किंवदंती के अनुसार, देवी को सारंगढ़ ले जाने के दौरान हुए विवाद और युद्ध के बाद देवी की मूर्ति देवसागर में ही स्थापित हो गई…
इसी परंपरा के चलते आज भी चैत्र पूर्णिमा पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है…
आज भी चैत्र पूर्णिमा के दिन सारंगढ़ राजमहल में देवी की नाक की पूजा होती है…
वहीं देवसागर में भटगांव जमींदार परिवार द्वारा मेले की परंपरा वर्षों से निभाई जा रही है…
आस्था, परंपरा और रहस्य से जुड़ा यह मेला हर साल लाखों श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है…




