जांजगीर-चांपा

कारागृह को सुधार और संस्कार परिवर्तन का तपोस्थल बनाएं” — ब्रह्मकुमार भगवान भाई का कैदियों को आध्यात्मिक संदेश

चांपा, 27 नवम्बर

जांजगीर-चांपा जिला कारागृह में बुधवार को आयोजित आध्यात्मिक एवं प्रेरक सत्र में माउंट आबू (राजस्थान) स्थित प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय से आए ब्रह्मकुमार भगवान भाई ने कैदियों को जीवन परिवर्तन, कर्म सिद्धांत और व्यवहार शुद्धि का संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि “यह केवल कारागृह नहीं, बल्कि आत्मचिंतन और संस्कार परिवर्तन का केंद्र है। यहाँ शिक्षा देने नहीं, बल्कि स्वयं को सुधारने के लिए रखा जाता है।”

“बदला नहीं—स्वयं को बदलने की प्रवृत्ति अपनाएं”

भगवान भाई ने कैदियों को संबोधित करते हुए कहा कि बदला लेने की भावना मानव जीवन का सबसे बड़ा शत्रु है।

उन्होंने कहा,

“हम उस परमपिता के बच्चे हैं जो शांति, दया और क्षमा का सागर है। लेकिन स्वयं को भूलने पर हम गलतियां करते हैं। यदि हम अपने अवगुण—ईर्ष्या, क्रोध, लोभ, चोरी, झगड़ा—को छोड़ दें, तो अपराध की प्रवृत्ति समाप्त हो जाती है।”

उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे कर्म न करें जिनसे धर्मराजपुरी में सिर झुकाना पड़े।

उनके अनुसार, जीवन में नैतिक मूल्यों का क्षय ही अपराधों की जड़ है, और सद्गुणों की धारणा से ही वास्तविक सुधार संभव हो सकता है।

“मन और व्यवहार परिवर्तन से ही कारागार सुधारगृह बनता है”

भगवान भाई ने कहा कि मनुष्य जीवन अत्यंत अनमोल है और इसे व्यर्थ कर्मों में नहीं गंवाना चाहिए।

उन्ब्रह्माकुमारी संस्था की शिक्षिकाओं और जेल प्रशासन का सहयोगहोंने कैदियों को प्रेरित करते हुए कहा—

“मजबूरी को परीक्षा समझें। धैर्य, सहनशीलता और आत्म-संयम से बड़ी से बड़ी कठिनाई पार की जा सकती है। जो जीवन में परिवर्तन लाता है वही श्रेष्ठ चरित्रवान बनता है। इसलिए इस कारागार को अपने लिए तपोस्थल बना लें।”

उन्होंने आगे कहा कि मनुष्य के विचार कर्म से पहले जन्म लेते हैं।

अगर हम बीती गलतियों को भूलकर आगे अच्छे कर्म करने का संकल्प लें, तो जीवन स्वतः बदल सकता है।

“गलती करने वाले से उसे माफ करने वाला बड़ा होता है। बदला लेने वाला पहले स्वयं को दुख देता है।”

स्थानीय ब्रह्माकुमारी आश्रम की राजयोग शिक्षिका बीके पुष्पा बहन ने कहा कि अपराधों की जड़ मन के विकार हैं और आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा मनुष्य विकारमुक्त होकर अपराधमुक्त बन सकता है।

जेल के मुख्य प्रहरी परमानंद सिधार ने कहा कि सकारात्मक सोच और बुरी आदतों को त्यागने से जीवन में सुधार आता है।

आरक्षक अरविंद पांडे ने कार्यक्रम के लिए ब्रह्माकुमारी संस्था को धन्यवाद दिया और आगे भी ऐसे आयोजन करने का अनुरोध किया।

जेल अधीक्षक डी.डी. टोंडर के निर्देशन और सद्भावनाओं से यह आध्यात्मिक कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

राजयोग मेडिटेशन और अनुभव साझा

कार्यक्रम के अंत में भगवान भाई ने कैदियों को अपराधमुक्त जीवन, मनोबल वृद्धि, आंतरिक शांति तथा संस्कार परिवर्तन के लिए राजयोग ध्यान कराया।

संदीप भाई ने अपने जीवन परिवर्तन के अनुभव साझा कर कैदियों को प्रेरित किया।

कार्यक्रम में बीके शंकर भाई, मनहरन भाई, और पंकज भाई भी उपस्थित रहे।

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