
लोकेशन-कांकेर/रिपोर्टर-ब्यूरो रिपोर्ट

कांकेर से एक बड़ी और निर्णायक खबर सामने आई है, जहां माओवादी संगठन को बड़ा झटका लगा है। मल्लेश के बाद अब माओवादी संगठन की डीवीसीएम सदस्य मासे बारसा ने पुलिस के सामने हथियार डाल दिए हैं।
कांकेर जिले के छिंदपदर गांव से जुड़ी इस बड़ी घटना में मासे बारसा जंगल के रास्ते हाथों में AK-47 लेकर कांकेर पहुंची और सीधे पुलिस अधीक्षक निखिल रखेचा के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
बताया जा रहा है कि मासे बारसा वर्ष 2003 से दंडकारण्य, अबूझमाड़ और उत्तर बस्तर के दुर्गम इलाकों में माओवादी संगठन के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही थी। संगठन के भीतर रहकर वह कई बड़ी गतिविधियों में शामिल रही और डीवीसीएम जैसे महत्वपूर्ण पद तक पहुंची।
लगातार सुरक्षाबलों की कार्रवाई, विकास योजनाओं के प्रभाव और मुख्यधारा से जुड़ने की इच्छा के चलते मासे बारसा ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया। जंगल का जीवन त्यागकर उसने सामान्य सामाजिक जीवन में लौटने की इच्छा जताई है।
इस पूरे आत्मसमर्पण की प्रक्रिया में नारायणपुर के वरिष्ठ पत्रकार रौशन ठाकुर की महत्वपूर्ण भूमिका सामने आई है, जिन्होंने संवाद और विश्वास कायम कर मासे बारसा को सरेंडर के लिए प्रेरित किया।
फिलहाल, आज पुलिस अधीक्षक कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर आत्मसमर्पण से जुड़ी शेष औपचारिक कार्यवाही पूरी की जाएगी। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह सरेंडर माओवादी नेटवर्क के लिए बड़ा मनोवैज्ञानिक झटका है और आने वाले समय में अन्य माओवादी भी मुख्यधारा में लौट सकते हैं।




