
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रायपुर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में नक्सल समस्या और विकास को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि माओवादी हिंसा के कारण छत्तीसगढ़ का विकास वर्षों तक बाधित रहा, जिससे खासकर आदिवासी और दूरस्थ इलाकों को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा।
गृह मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद ने न सिर्फ राज्य की आर्थिक प्रगति को रोका, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और संचार जैसी मूलभूत सुविधाओं के विस्तार में भी बड़ी बाधा पैदा की। उन्होंने यह भी कहा कि कई इलाकों में लंबे समय तक शासन और प्रशासन की पहुंच सीमित रही, जिसका सीधा असर आम नागरिकों के जीवन पर पड़ा।



अमित शाह ने स्पष्ट किया कि अब केंद्र सरकार की नीति सिर्फ सुरक्षा कार्रवाई तक सीमित नहीं है, बल्कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में समग्र विकास पर विशेष फोकस किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि आदिवासी इलाकों में सड़क निर्माण, मोबाइल कनेक्टिविटी, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र और रोजगार से जुड़ी योजनाओं को तेज़ी से लागू किया जा रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर विकास की दिशा में आगे बढ़ सकें। साथ ही उन्होंने सुरक्षा बलों की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि उनके साहस और रणनीतिक अभियानों के कारण नक्सल गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण संभव हो पाया है।
अमित शाह के इस बयान के बाद राज्य की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार से जवाबदेही की मांग की है, जबकि सत्तापक्ष इसे केंद्र की मजबूत नीति और इच्छाशक्ति का परिणाम बता रहा है।
कुल मिलाकर, गृह मंत्री का यह बयान एक बार फिर यह संकेत देता है कि छत्तीसगढ़ में सुरक्षा के साथ-साथ विकास को समान प्राथमिकता देकर राज्य को नई दिशा देने की कोशिश की जा रही है।



