GDP आंकड़ों के बाद बाजार में दिख सकती है स्थिरता, मिडकैप आईटी में ग्रोथ की उम्मीद

भारत के ताज़ा जीडीपी आंकड़ों के बाद बाजार में अब स्थिरता लौटने के संकेत दिख रहे हैं। रॉकस्टड कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर अभिषेक अग्रवाल का कहना है कि बाजार इन आंकड़ों पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देगा, क्योंकि इसमें कोई भी नकारात्मक सरप्राइज नजर नहीं आया है। उनके अनुसार भारत दुनिया की सबसे तेज रफ्तार से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इन्फ्लेशन को लेकर भी कोई बड़ी चिंता नहीं है।
अग्रवाल ने कहा कि सप्लाई और डिमांड के बीच बेहतर बैलेंसिंग के चलते इन्फ्लेशन उस स्तर पर नहीं पहुंचा है जहां ब्याज दरों में कटौती असंभव लगे। उनका मानना है कि आने वाले समय में भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
एफआईआई की रणनीति में सकारात्मक बदलाव
बाजार की धारणा को मजबूत करने में एफआईआई के रुख का बड़ा योगदान है। अग्रवाल के अनुसार एफआईआई की कुल खरीदारी स्थिति बताती है कि बैंक निफ्टी में उन्होंने मजबूत पोजिशन बनाई है।
इंडेक्स फ्यूचर्स में एफआईआई की शॉर्ट पोजिशन अब धीरे-धीरे खरीदारी में बदल रही है, जो मोमेंटम शिफ्ट का संकेत है। यह ट्रेंड दर्शाता है कि उभरते बाजारों में ग्लोबल एलोकेशन बढ़ रहा है।
इसके साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में और अधिक गिरावट की संभावना कम होती दिखाई दे रही है, जिसके चलते एफआईआई अब भारत की ओर अपना रुख तेजी से कर रहे हैं। इन्हीं कारणों से आने वाले दिनों में बाजार में स्थिरता की उम्मीद जताई जा रही है।
आईटी सेक्टर: लार्जकैप की तुलना में मिडकैप में ज्यादा ग्रोथ की संभावना
आईटी सेक्टर पर बात करते हुए अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियां ग्लोबल कंपनियों की तुलना में AI ट्रेंड को उतनी तेजी से नहीं पकड़ पाईं।
2022 के बाद से भारतीय फ्रंट-लीड टेक कंपनियां विकास की धीमी राह पर हैं, जहां सेल्स ग्रोथ सिंगल डिजिट में है और प्रॉफिट ग्रोथ लगभग फ्लैट बनी हुई है।
भारतीय कंपनियों ने AI की रेस में पिछड़कर पारंपरिक कामकाज पर अधिक ध्यान दिया, यही वजह है कि लार्जकैप आईटी कंपनियों का प्रदर्शन कमजोर दिखाई दे रहा है।
इसके मुकाबले मिडकैप आईटी कंपनियों में ग्रोथ की संभावनाएँ अधिक बनी हुई हैं।




