मानसिक स्वास्थ्य बना राष्ट्रीय चिंता का विषय, हेल्पलाइन पर बढ़ती कॉल्स ने बढ़ाई गंभीरता

नई दिल्ली: भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं तेजी से उभरकर सामने आ रही हैं, जो अब एक गंभीर राष्ट्रीय चुनौती का रूप लेती जा रही हैं। बदलती जीवनशैली, काम का बढ़ता दबाव, सामाजिक और आर्थिक तनाव जैसे कई कारणों से लोगों में मानसिक परेशानी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।सरकार द्वारा शुरू की गई Tele-MANAS हेल्पलाइन इस स्थिति की गंभीरता को दर्शाती है। इस हेल्पलाइन पर अब तक 34 लाख से अधिक कॉल दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है जो तनाव, चिंता, अवसाद और अन्य मानसिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि देश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समस्याएं व्यापक स्तर पर मौजूद हैं।विशेषज्ञों के अनुसार, एक ओर जहां मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता पहले की तुलना में बढ़ी है, वहीं दूसरी ओर गुणवत्तापूर्ण मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच अभी भी सीमित है। खासतौर पर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों और काउंसलिंग सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। इसके साथ ही समाज में इस विषय को लेकर मौजूद झिझक और कलंक को खत्म करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, ताकि लोग खुलकर अपनी समस्याओं को साझा कर सकें और सहायता प्राप्त कर सकें।कुल मिलाकर, बढ़ते आंकड़े यह स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि मानसिक स्वास्थ्य अब केवल व्यक्तिगत मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति और प्राथमिकता के रूप में देखने की आवश्यकता है।




