चालान या टोल टैक्स बकाया तो नेशनल हाइवे बंद! सरकार ला रही है बड़ा नियम

मोटर व्हीकल एक्ट में संशोधन की तैयारी, नियम तोड़ने वालों पर होगी सीधी कार्रवाई
नई दिल्ली | रिपोर्ट
देशभर के वाहन चालकों के लिए जल्द ही ड्राइविंग के नियम सख्त होने वाले हैं। केंद्र सरकार मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 में अहम संशोधन की तैयारी कर रही है। प्रस्तावित बदलावों के तहत यदि किसी वाहन पर ई-चालान या टोल टैक्स बकाया पाया गया, तो उसे नेशनल हाइवे पर चलने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह प्रस्ताव संसद के आगामी बजट सत्र में पेश किए जाने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ऐसे वाहन चालकों पर सख्ती करना चाहता है जो बार-बार ट्रैफिक नियमों की अनदेखी करते हैं या टोल टैक्स से बचते हैं। नए नियमों के तहत प्रवर्तन एजेंसियों को टोल प्लाजा पर ही बकाया रखने वाले वाहनों को रोकने का अधिकार मिल सकता है।
45 हजार किलोमीटर टोल नेटवर्क पर नजर
देश में करीब 45,428 किलोमीटर लंबा टोल रोड नेटवर्क है। सरकार का मानना है कि इस नेटवर्क तक पहुंच सीमित करने से वाहन चालक नियमों का पालन करने के लिए मजबूर होंगे और टोल वसूली में सुधार आएगा।
सड़क सुरक्षा है मुख्य उद्देश्य
सरकार का कहना है कि यह कदम केवल सख्ती के लिए नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाया जा रहा है। भारत में सड़क दुर्घटनाओं और मौतों की संख्या लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। सरकार का लक्ष्य 2030 तक सड़क हादसों में होने वाली मौतों और गंभीर चोटों को आधा करना है।
ई-चालान वसूली बनी चुनौती
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2015 से 2025 के बीच करीब 40 करोड़ ई-चालान जारी किए गए, जिनकी कुल राशि लगभग 61 हजार करोड़ रुपये रही। हालांकि, इनमें से केवल एक-तिहाई चालानों की ही वसूली हो सकी है। इसी वजह से सरकार अब कड़े और प्रभावी उपायों पर विचार कर रही है।
इन सेवाओं पर भी लग सकता है प्रतिबंध
हाल ही में अधिसूचित सेंट्रल मोटर व्हीकल (सेकंड अमेंडमेंट) रूल्स, 2026 के तहत बकाया चालान या टोल टैक्स न चुकाने पर कई सुविधाएं रोकी जा सकती हैं। इनमें वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट, इंश्योरेंस रिन्यूअल, ट्रांसफर ऑफ ओनरशिप और कमर्शियल वाहनों का नेशनल परमिट शामिल है।
भविष्य में और सख्ती संभव
प्रस्तावों में ड्राइविंग लाइसेंस रिन्यूअल पर सख्त जांच, इंश्योरेंस प्रीमियम को ड्राइविंग रिकॉर्ड से जोड़ने और यहां तक कि बकाया होने पर पेट्रोल-डीजल न देने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि नियम जरूरी हैं, लेकिन इन्हें चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी न हो। सही ढंग से लागू होने पर यह योजना सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक अनुशासन दोनों को बेहतर बना सकती है।




