दंहतरी के दिव्य कलाकार बसंत साहू को राष्ट्रीय सम्मान, विपरीत परिस्थितियों में भी गढ़ी सफलता की अनोखी कहानी

दंहतरी, छत्तीसगढ़
कला के प्रति असाधारण लगन और अद्भुत प्रतिभा का परिचय देते हुए दंहतरी जिले के प्रतिभाशाली कलाकार बसंत साहू को विकलांग व्यक्तियों की श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन लोगों को दिया जाता है जिन्होंने शारीरिक चुनौतियों के बावजूद देश में प्रेरणादायक योगदान दिया हो।
बसंत साहू की जिंदगी एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गई थी। दुर्घटना में उन्हें 95% तक की विकलांगता झेलनी पड़ी, लेकिन हौसला नहीं टूटा। शरीर कमजोर हुआ, पर मन और कल्पनाशक्ति पहले से भी मजबूत निकल आई। उन्होंने पेंटिंग को अपनी ताकत बनाया और धीरे-धीरे यह जुनून उनकी पहचान बन गया।
उनकी कला में छत्तीसगढ़ की लोक-संस्कृति, गांवों का प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय जीवन, और सामाजिक भावनाएं बेहद प्रभावशाली ढंग से झलकती हैं।
रंगों की भाषा के माध्यम से वे कहानियाँ बुनते हैं—ऐसी कहानियाँ जो प्रदेश की माटी और परंपराओं से सीधी जुड़ी होती हैं।
बसंत साहू की कृतियाँ न सिर्फ राज्य में, बल्कि राष्ट्रीय मंच पर भी अपनी छाप छोड़ चुकी हैं। उनकी कई पेंटिंग्स राष्ट्रपति भवन, दिल्ली के प्रमुख कला संग्रहालय, और कई प्रतिष्ठित स्थलों में प्रदर्शित हो चुकी हैं।
कला समीक्षकों के अनुसार, उनकी चित्रशैली भावनाओं, रंगों और लोक कला का दुर्लभ मेल है, जो उन्हें अन्य कलाकारों से अलग खड़ा करती है।
राष्ट्रीय सम्मान उनके संघर्ष, प्रतिभा और जज्बे को सच्ची पहचान दिलाता है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है और विशेषकर उन युवाओं के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को सहेजकर आगे बढ़ना चाहते हैं।




