पंडित सुंदरलाल शर्मा जी की 145वीं जयंती पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का शुभारंभ, जनजातीय संस्कृति और महानायकों की भूमिका पर मंथन

स्थान – कोनी (बिलासपुर)
रिपोर्टर मयंक
बिलासपुर
पंडित सुंदरलाल शर्मा जी की 145वीं जयंती के अवसर पर जनजाति शोध एवं अनुशीलन केंद्र, नई दिल्ली के तत्वावधान में पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, छत्तीसगढ़ बिलासपुर में तीन दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी 21 दिसंबर से 23 दिसंबर 2025 तक आयोजित होगी।
संगोष्ठी का मुख्य विषय “भारतीय जनजातियां, सांस्कृतिक विरासत एवं महानायकों की भूमिका” रखा गया है, जिसके अंतर्गत देशभर से आए विद्वान, शोधार्थी और समाज के प्रतिनिधि जनजातीय समाज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका पर विचार-विमर्श कर रहे हैं।


कार्यक्रम का शुभारंभ 21 दिसंबर को प्रातः 10:30 बजे सिहावा अकादमिक भवन, पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय परिसर में हुआ। उद्घाटन सत्र के मुख्य अतिथि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. वंश गोपाल सिंह रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में पंडित सुंदरलाल शर्मा जी के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान, सामाजिक चेतना और जनजातीय समाज के उत्थान के लिए किए गए कार्यों को स्मरण करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को इतिहास और संस्कृति से जोड़ने का अवसर मिलता है।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोधार्थी, शिक्षक, विद्यार्थी, जनजातीय समाज के प्रतिनिधि एवं लोक कला-संस्कृति से जुड़े कलाकार सक्रिय रूप से सहभागिता कर रहे हैं। विभिन्न सत्रों में शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं, जिनमें जनजातीय परंपराएं, सांस्कृतिक धरोहर और महान व्यक्तित्वों की भूमिका पर गहन चर्चा की जा रही है।

कार्यक्रम में विशेष रूप से शिक्षक जितेंद्र थवाईत (शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला बसवाही, विकासखंड सोनहत), सहायक शिक्षक धनेश्वर प्रसाद पटेल (शासकीय प्राथमिक शाला कोरवापारा, विकासखंड राजपुर), शिक्षिका जागृति साहू (शासकीय प्राथमिक शाला तिलवनढांड, विकासखंड बैकुंठपुर) सहित विभिन्न जिलों से आए शिक्षक, विश्वविद्यालय के छात्राध्यापक तथा बीएड-डीएलएड के छात्राध्यापक बड़ी संख्या में शामिल हुए।




