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NDA की जबरदस्त जीत: नीतीश फैक्टर फिर चला, चिराग बने ‘किंगमेकर’; महागठबंधन 35 सीटों पर सिमटा — जानिए जीत की 10 बड़ी वजहें

पटना

बिहार विधानसभा चुनाव परिणामों ने एक बार फिर साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सामाजिक समीकरण + कल्याणकारी योजनाओं का फॉर्मूला अभी भी राज्य की राजनीति में सबसे भरोसेमंद है।
NDA ने इस चुनाव में 202 सीटों पर जीत दर्ज की। इस बार JDU ने शानदार वापसी करते हुए 85 सीटें, BJP ने 89 सीटें, और चिराग पासवान की LJP(R) ने 19 सीटें जीतीं। पिछले चुनाव की तुलना में JDU और LJP(R) दोनों का ग्राफ तेजी से ऊपर गया है।

महागठबंधन की स्थिति बेहद खराब रही और पूरा गठबंधन मिलकर 35 सीटों पर ही सिमट गया।

जहां नीतीश कुमार के बड़े घोषणापत्रों ने वोटर्स को सीधे प्रभावित किया, वहीं चिराग पासवान का NDA में शामिल होना JDU के लिए गेमचेंजर साबित हुआ। विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ चिराग फैक्टर ने JDU को 32 सीटों का सीधा लाभ दिया।

आइए समझते हैं NDA की इस जबरदस्त जीत की 10 प्रमुख वजहें

  1. महिला वोट बैंक: “10 हजारिया योजना” ने किया कमाल चुनाव से ठीक पहले नीतीश सरकार ने 1.21 करोड़ महिलाओं के खाते में 10,000 रुपये भेजे। यह फैसला सीधा-सीधा गेमचेंजर साबित हुआ।
    बिहार में कुल 3.51 करोड़ महिला वोटर हैं और इनमें से लगभग 40% जीविका दीदी हैं।

2020 में NDA को महिला वोट का 38% मिला था

इस बार 10 हजार की डायरेक्ट मदद ने इस वोट बैंक को मजबूत कर दिया
महिलाओं की वोटिंग 71.6% तक पहुंच गई सरकार द्वारा आशा वर्कर, ममता वर्कर और फैसिलिटेटर्स की आय बढ़ाने से भी इनका भरोसा NDA की ओर गया।महिलाओं के खिलाफ महागठबंधन का 30,000 रुपये वार्षिक सहायता वाला वादा प्रभावी नहीं हो पाया।

  1. लोअर मिडिल क्लास को बड़ा फायदा—125 यूनिट फ्री बिजली 1 अगस्त 2025 से 1.67 करोड़ परिवारों को 125 यूनिट फ्री बिजली दी गई।
    बिहार के 5 करोड़ से ज्यादा वोटर सीधे इस योजना से प्रभावित हुए।
    महागठबंधन का “200 यूनिट फ्री बिजली” वाला वादा वोटरों को आकर्षित नहीं कर पाया।
  2. बुजुर्गों और आश्रितों को 1100 रुपये पेंशन
    22 जून 2025 से पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये प्रति माह कर दी गई।
    इसका सीधा असर 1.11 करोड़ लाभार्थियों पर पड़ा
    विपक्ष द्वारा 1500 रुपये पेंशन का वादा भी असरदार नहीं रहा।
  3. युवा वोट: ग्रेजुएट बेरोजगारों को 1000 रुपये ग्रेजुएट युवाओं को 1000 रुपये प्रति माह बेरोजगारी भत्ता—
    अब तक 7.6 लाख युवक इसका लाभ ले रहे हैं।
    इसके साथ 2030 तक 1 करोड़ रोजगार/नौकरी देने की घोषणा ने युवा वोट को साधा।
  4. स्टूडेंट वोट: क्रेडिट कार्ड लोन पर ब्याज माफ
    लगभग 4 लाख छात्रों को JDU सरकार के ब्याज-मुक्त शिक्षा ऋण का फायदा मिला।
    लोन चुकाने की समयसीमा भी बढ़ाई गई—इसने छात्र वोट पक्का कर दिया।
  5. जातीय समीकरण में NDA की परफेक्ट सोशल इंजीनियरिंग

NDA ने:
85 सवर्ण,39 दलित,37 कुर्मी-कोइरी,29 अति पिछड़ा,27 वैश्य,19 यादव,5 मुस्लिम,2 आदिवासी
कैंडिडेट उतारकर हर जाति को प्रतिनिधित्व दिया।

चिराग पासवान: JDU के ‘हनुमान’ साबित
पासवान वोट बैंक लगभग 50 सीटों में निर्णायक है।
LJP(R) ने 19 सीटें जीतीं और चिराग का समर्थन JDU को 32 सीटों का फायदा दे गया।

उपेंद्र कुशवाहा का दबदबा
कुशवाहा वोट बिहार की लगभग 70 सीटों पर प्रभावी।
RLM ने 6 में से 4 सीटें जीतीं—NDA के लिए बड़ा सहारा।
मांझी का मुसहर वोट35 सीटों पर प्रभाव रखने वाले मुसहर वोट पर मांझी का असर—6 में से 5 सीटें जीतीं।

  1. विकास + हिंदुत्व का मिला-जुला फॉर्मूला

NDA ने विकास कार्यों और मंदिर राजनीति का संतुलन साधा—
पूर्णिया एयरपोर्ट शुरू हुआ बेगूसराय का 6-लेन केबल ब्रिज
सीतामढ़ी के जानकी मंदिर का भूमि पूजन इन फैसलों का प्रभाव 70+ सीटों पर पड़ा।

  1. PM मोदी की 16 रैलियों का असर—97 सीटें जीत लीं जहां-जहां मोदी की सभाएं हुईं, उन 122 सीटों में NDA ने 97 जीतीं।
    मोदी फैक्टर अभी भी बिहार में पूरी तरह प्रभावी है।
  2. प्रशांत किशोर नहीं चले
    240 सीटों पर लड़ने के बावजूद जन सुराज का वोट शेयर नगण्य रहा।
    NDA को नुकसान पहुँचाने की संभावना थी, लेकिन उलटा असर देखा गया।
  3. महागठबंधन की सबसे बड़ी कमजोरी—फूट, देरी और भ्रम

महागठबंधन:
CM फेस पर आखिरी समय तक उलझा रहा
सीट बंटवारे को लेकर अंत तक विवाद
9 सीटों पर आपस में ही उम्मीदवार खड़े कर दिए
बड़े वादे किए, लेकिन विश्वसनीयता शून्य रही

महागठबंधन का सबसे बड़ा वादा “हर परिवार को नौकरी” जनता ने गंभीरता से नहीं लिया।

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