जांजगीर-चांपा

न पुलिस का डर, न माइनिंग की नजर… हसदेव नदी को ट्रैक्टर मालिकों ने बना लिया लूट का अड्डा!

रिपोर्ट-सरोज रात्रे की

ये कोई फिल्मी सीन नहीं,
ये बलौदा थाना क्षेत्र के ग्राम सक्तिगुड़ी की कड़वी सच्चाई है—
जहां हसदेव नदी का सीना दिनदहाड़े छलनी किया जा रहा है और जिम्मेदार विभाग आंखों पर पट्टी बांधे बैठे हैं।

खुलेआम अवैध रेत खनन, सैकड़ों ट्रैक्टर बेलगाम

हसदेव नदी से बिना अनुमति, बिना रॉयल्टी और बिना डर रोज़ाना सैकड़ों ट्रैक्टर रेत भरकर निकल रहे हैं।
ना कोई परमिट जांच,
ना पुलिस की रोक,
ना माइनिंग विभाग की कार्रवाई।

ट्रैक्टर मालिक बने माफिया, प्रशासन बना मूकदर्शक

स्थानीय लोगों का आरोप है कि
अवैध खनन ट्रैक्टर मालिकों की मिलीभगत
पुलिस-माइनिंग-प्रशासन की चुप्पी
और ऊपर तक फैली ‘सेटिंग’ के बिना ये संभव ही नहीं।

पर्यावरण तबाही के कगार पर

लगातार खनन से

हसदेव नदी सूखने की ओर बढ़ रही है

जलस्तर गिर रहा है

आने वाले समय में खेती और पेयजल पर संकट तय है

लेकिन अफसोस…
जिन्हें रोकना चाहिए, वही संरक्षण दे रहे हैं!

शिकायतें हुईं, कार्रवाई नहीं

ग्रामीणों का साफ आरोप है कि

“शिकायत करो तो फाइल दबा दी जाती है,
अवैध खनन चलता रहता है।”

सबसे बड़ा सवाल

क्या ट्रैक्टर मालिक कानून से ऊपर हैं?
क्या माइनिंग विभाग सिर्फ कागज़ों में सक्रिय है?
क्या पुलिस की गाड़ियां सिर्फ आम जनता के लिए हैं?

कब जागेगा प्रशासन?

कब रुकेगी हसदेव नदी की ये लूट?
या फिर जब नदी पूरी तरह खत्म हो जाएगी,
तब सिर्फ जांच के आदेश और औपचारिक कार्रवाई होगी?

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