छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में जलवायु शिक्षा को नई दिशा — रायपुर में EduResilience 2025 सम्मेलन में बना क्लाइमेट-रेसिलिएंट स्कूलों का रोडमैप

रायपुर में 27 नवंबर 2025 को आयोजित EduResilience 2025 सम्मेलन ने छत्तीसगढ़ में स्कूल शिक्षा को जलवायु-संवेदनशील और भविष्य उन्मुख बनाने की दिशा में नए आयाम स्थापित किए। इस सम्मेलन में राज्य सरकार, शिक्षा विभाग, विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञ, गैर-सरकारी संगठनों तथा विकास एजेंसियों ने भाग लिया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था—

स्कूलों में जलवायु शिक्षा (Climate Education) को बढ़ावा देना,

विद्यार्थियों को पर्यावरणीय आपदाओं के प्रति सतर्क व सक्षम बनाना,

और प्रदेश में क्लाइमेट रेसिलिएंट स्कूल मॉडल को लागू करने के लिए रणनीति तैयार करना।

सम्मेलन में यह बात उभरकर सामने आई कि जलवायु परिवर्तन अब शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा बन चुका है, और बच्चों को प्रारंभिक स्तर पर ही पर्यावरण जागरूकता तथा जलवायु चुनौतियों से निपटने की क्षमता सिखाना समय की मांग है।

सम्मेलन में लगभग 70 ब्लॉक-रेसोर्स कोऑर्डिनेटर (BRC) शामिल हुए, जिन्हें जिले और गांव स्तर पर—

शिक्षकों के प्रशिक्षण,

जलवायु पाठ्यक्रम के विकास,

स्कूलों में क्लाइमेट-एडजस्टमेंट,

और स्थानीय समुदाय को जोड़ने
की जिम्मेदारी दी जाएगी।

विशेषज्ञों ने बताया कि ‘क्लाइमेट-रेसिलिएंस’ केवल पर्यावरण पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें—

स्कूल भवनों की सुरक्षा,

बच्चों की आपदा-तैयारी,

सुरक्षित पानी और स्वच्छ ऊर्जा,

और ऐसी शिक्षा प्रणाली तैयार करना
शामिल है जो जलवायु परिवर्तन की चुनौती को समझते हुए आगे बढ़े।

सरकार का कहना है कि इस पहल से—

आने वाली पीढ़ियाँ अधिक जागरूक,

पर्यावरण-अनुकूल सोच विकसित करने वाली,

और प्राकृतिक आपदाओं के प्रति तैयार
बनेंगी।

EduResilience 2025 को राज्य के शिक्षा ढांचे में एक महत्वपूर्ण सुधार माना जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के हजारों स्कूलों में जलवायु-आधारित शिक्षण मॉडल को मजबूत आधार देगा।

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