भारत में ग्रीन जॉब्स का नया युग: पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक विकास की दोहरी सफलता

नई दिल्ली | रिपोर्ट डेस्क
भारत अब “ग्रीन जॉब्स” यानी हरित नौकरियों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है — ऐसी नौकरियाँ जो न केवल रोजगार के अवसर बढ़ाती हैं बल्कि पर्यावरण की सुरक्षा में भी अहम योगदान देती हैं।
केंद्रीय बजट 2024-25 में सरकार ने हरित नौकरियों को विशेष प्राथमिकता दी है, जिससे देश के सतत् विकास लक्ष्यों (SDGs) को पूरा करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
क्या हैं ग्रीन जॉब्स?
‘ग्रीन जॉब्स’ वे रोजगार हैं जो पर्यावरण की गुणवत्ता को बनाए रखने या सुधारने में मदद करते हैं।
इनका उद्देश्य है — आर्थिक विकास को गति देना और पर्यावरणीय नुकसान को कम करना।
इन नौकरियों में शामिल हैं:
नवीकरणीय ऊर्जा (सोलर, विंड)
कचरा प्रबंधन
ऊर्जा दक्षता तकनीक
सतत् कृषि और परिवहन
स्वच्छ प्रौद्योगिकी और पुनर्चक्रण उद्योग
इन क्षेत्रों में काम करने वाले लोग सीधे तौर पर सतत् विकास और जलवायु संतुलन के लिए योगदान देते हैं।
सतत् विकास और ग्रीन जॉब्स का गहरा संबंध
सतत् विकास का अर्थ है — वर्तमान पीढ़ी की ज़रूरतों को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए संसाधन बचाना।
ग्रीन जॉब्स इसी अवधारणा को व्यवहार में लाते हैं।
ये नौकरियाँ न सिर्फ आर्थिक दृष्टि से उपयोगी हैं, बल्कि जीवनशैली और उत्पादन प्रणाली में पर्यावरण-संवेदनशील परिवर्तन भी लाती हैं।
ग्रीन जॉब्स कैसे बदल रहे हैं भारत की अर्थव्यवस्था
भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, लेकिन पर्यावरणीय चुनौतियाँ भी समानांतर रूप से बढ़ रही हैं।
ऐसे में “ग्रीन इकॉनमी” का विकास देश के लिए दोहरा लाभ लेकर आता है —
नए रोजगार के अवसर
पर्यावरणीय स्थिरता में सुधार
उदाहरण के लिए,
सौर पैनल इंस्टॉलर,
पवन टरबाइन तकनीशियन,
ग्रीन बिल्डिंग इंजीनियर,
वेस्ट मैनेजमेंट स्पेशलिस्ट जैसी नौकरियाँ आज तेजी से बढ़ते क्षेत्रों में शामिल हैं।
भारत में ग्रीन जॉब्स के सामने चुनौतियाँ
हालाँकि संभावनाएँ अपार हैं, लेकिन कई चुनौतियाँ भी बनी हुई हैं —
नीतिगत ढाँचे की कमी
तकनीकी अवसंरचना की सीमाएँ
कौशल (स्किल) असंतुलन
वित्तीय संसाधनों तक सीमित पहुँच
कई हरित उद्यमों को अब भी कम लागत वाले ऋण और नीति समर्थन की कमी का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में टेक्नोलॉजी की कमी भी ग्रीन सेक्टर की प्रगति को धीमा करती है।
समाधान: नीति, निवेश और प्रशिक्षण का संगम
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत को हरित नौकरियों की दिशा में आगे बढ़ाने के लिए एक “त्रिस्तरीय दृष्टिकोण” अपनाना होगा —
- सरकार को स्पष्ट नीति और वित्तीय प्रोत्साहन देने होंगे।
- निजी क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा और नवाचार में निवेश बढ़ाना चाहिए।
- शिक्षण संस्थानों को हरित प्रौद्योगिकी आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान देना होगा।
इसके अलावा, सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model) को भी बढ़ावा देने से ग्रीन सेक्टर में रोजगार और निवेश दोनों को प्रोत्साहन मिलेगा।
किन क्षेत्रों में बढ़ेंगे हरित रोजगार
भारत में ग्रीन जॉब्स के अवसर तेजी से इन क्षेत्रों में बन रहे हैं:
नवीकरणीय ऊर्जा – सौर और पवन परियोजनाएँ
ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर – ऊर्जा-कुशल भवन, स्मार्ट ग्रिड, टिकाऊ परिवहन
सतत् कृषि और जैविक खेती
वेस्ट मैनेजमेंट और रीसाइक्लिंग उद्योग
इको-टूरिज्म और सतत् आतिथ्य सेवाएँ
क्लीन टेक्नोलॉजी और रिसर्च इनोवेशन
सरकार की अनुमानित रिपोर्ट के अनुसार, भारत में आने वाले वर्षों में 1 करोड़ तक हरित रोजगार सृजित किए जा सकते हैं।




