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घरेलू उद्योग को नई ताकत: मैन्युफैक्चरिंग और MSME सेक्टर पर सरकार का बड़ा दांव

केंद्र सरकार ने घरेलू विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और MSME सेक्टर को देश की आर्थिक रीढ़ मानते हुए इन्हें मजबूत करने पर विशेष फोकस बढ़ा दिया है। सरकार नीतिगत सुधारों, वित्तीय सहायता और प्रोत्साहन योजनाओं के जरिए छोटे व मध्यम उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में काम कर रही है।
नीति निर्माताओं का मानना है कि मजबूत MSME सेक्टर न केवल रोजगार सृजन करेगा, बल्कि निर्यात बढ़ाने और आयात पर निर्भरता घटाने में भी अहम भूमिका निभाएगा।
सरकार की प्रमुख पहलें
नीतिगत समर्थन और आसान नियम
उद्योगों के लिए अनुपालन सरल करने, डिजिटल प्रक्रियाएं बढ़ाने और लाइसेंसिंग को आसान बनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि कारोबार की लागत घटे।


वित्तीय सहायता और क्रेडिट एक्सेस
बैंकों और वित्तीय संस्थानों के जरिए MSME को सस्ता और समय पर कर्ज उपलब्ध कराने की कोशिशें तेज की गई हैं, जिससे उत्पादन और विस्तार को बल मिले।
‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा
घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए स्थानीय सप्लाई चेन, औद्योगिक क्लस्टर और तकनीक उन्नयन पर निवेश किया जा रहा है।
निर्यात प्रोत्साहन
MSME उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंच दिलाने के लिए गुणवत्ता सुधार, मानकीकरण और मार्केट एक्सेस पर काम किया जा रहा है।
विशेषज्ञों की राय
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और MSME में निवेश से
रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे
निर्यात में वृद्धि होगी
क्षेत्रीय विकास को गति मिलेगी
GDP ग्रोथ को दीर्घकालिक समर्थन मिलेगा
सरकारी संदेश
सरकार का कहना है कि यह फोकस केवल तात्कालिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर और वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है।

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