चांपा में एनएचडीसी का जीआई जागरूकता एवं तकनीकी शिविर सफल, बुनकरों को मिले कानूनी व विपणन लाभों की जानकारी

चांपा (छत्तीसगढ़)
राष्ट्रीय हथकरघा विकास निगम (एनएचडीसी) द्वारा विकास आयुक्त (हैंडलूम), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन में चांपा में भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकरण को लेकर एक दिवसीय जागरूकता एवं तकनीकी शिविर का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम 09 जनवरी 2026, शुक्रवार को होटल सुमीत इन, चांपा में संपन्न हुआ।
शिविर में हथकरघा बुनकरों, कारीगरों, वस्त्र उद्यमियों के साथ बुनकर सेवा केंद्र–रायगढ़, जिला हाथकरघा कार्यालय, रेशम विभाग तथा केंद्रीय रेशम बोर्ड (CSB) के अधिकारी उपस्थित रहे। विशेषज्ञों ने जीआई पंजीकरण की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज, कानूनी संरक्षण, ब्रांडिंग और विपणन में मिलने वाले लाभों पर विस्तार से जानकारी दी।
मुख्य अतिथि के रूप में दिल्ली से पधारे एनएचडीसी के प्रबंध निदेशक कमोडोर राजीव अशोक (सेवानिवृत्त) ने जीआई टैग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह न केवल उत्पाद की मौलिकता को सुरक्षित करता है, बल्कि बुनकरों को कानूनी अधिकार, बेहतर बाजार पहुंच और उचित मूल्य दिलाने में भी सहायक होता है। उन्होंने चांपा की पारंपरिक रेशमी विरासत को संरक्षित करते हुए उसे राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच पर सशक्त बनाने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2010 में ‘Champa Silk Saree and Fabrics’ को जीआई टैग प्राप्त हुआ था, जिससे चांपा–रायगढ़ क्षेत्र को विशिष्ट पहचान मिली। इस उपलब्धि में बुनकर कल्याण समिति रायपुर के अध्यक्ष श्री कमल देवांगन के नेतृत्व की अहम भूमिका रही।
शिविर में श्री अशोक कुमार (वैज्ञानिक), विजय सावनेरकर (कार्यालय प्रमुख), मधुप कुमार चंदन (सहायक निदेशक), कमल देवांगन (अध्यक्ष), मनमोहन देवांगन सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। सैकड़ों की संख्या में बुनकर भाई-बहनों ने सहभागिता कर कार्यक्रम को सफल बनाया।
आयोजन का उद्देश्य चांपा की पारंपरिक सिल्क साड़ी एवं वस्त्रों को सुदृढ़ पहचान दिलाना, बुनकरों का आर्थिक सशक्तिकरण करना तथा सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण करना रहा। इस अवसर पर “मेरा हथकरघा, मेरा गौरव” और “My Handloom, My Pride” का संदेश भी दिया गया। एनएचडीसी ने भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रम निरंतर आयोजित करने का संकल्प व्यक्त किया।




