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संस्कृति की रात, भारत की पहचान – जम्बूरी नाईट में लोक विरासत का महासंगम

जिला : बालोद

के पी. चंद्राकर

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित राष्ट्रीय जम्बूरी नाईट भारतीय सांस्कृतिक एकता का भव्य प्रतीक बनकर सामने आई। देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे रोवर-रेंजरों ने अपनी-अपनी लोक कलाओं, पारंपरिक नृत्यों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भारत की विविधता को एक मंच पर जीवंत कर दिया।ढोल, मांदर और नगाड़ों की गूंजती थाप पर थिरकते कदमों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं ने जहां मिट्टी की सोंधी खुशबू बिखेरी, वहीं अन्य राज्यों के कलाकारों ने रंग-बिरंगे परिधानों और भावपूर्ण नृत्य मुद्राओं से अपनी सांस्कृतिक पहचान प्रस्तुत कीl

यह आयोजन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय एकता और साझा विरासत के संदेश को मजबूती से सामने लाया। रोवर-रेंजरों ने अपने प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट किया कि संस्कृति किसी सीमा में बंधी नहीं होती, बल्कि यही विविधता भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।दुधली की धरती पर सजी यह जम्बूरी नाईट अनुशासन, परंपरा और युवा शक्ति को जड़ों से जोड़ने का सशक्त प्रयास बनकर उभरी।

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