जांजगीर में बीमार मरीज नहीं… ‘बीमार सिस्टम’! स्वास्थ्य मिशन की दर्जनभर सरकारी गाड़ियां महीनों से ठप

लोकेशन — जांजगीर–चांपा
जांजगीर से एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। स्वास्थ्य सेवाएं देने वाला विभाग ही आज खुद ‘बीमार’ नज़र आ रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन जांजगीर के ऑफिस में एक-दो नहीं, बल्कि एक दर्जन से भी ज्यादा सरकारी गाड़ियां महीनों से खड़ी-खड़ी जर्जर हो चुकी हैं। न मरम्मत, न देखरेख… और इसका सीधा असर पड़ रहा है उन मरीजों पर जिन्हें समय पर एम्बुलेंस और स्वास्थ्य सुविधा की जरूरत होती है।
सरकार ने इन वाहनों को ग्रामीण और शहरी इलाकों में तेज, बेहतर और तत्काल स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के उद्देश्य से दिया था। लेकिन विभाग की लापरवाही ने इन गाड़ियों को कबाड़ बनने की कगार पर पहुंचा दिया है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालय के परिसर में खड़ी ये गाड़ियां धूल और जंग से ढकी पड़ी हैं। टायर पंक्चर, बैटरी डाउन, इंजन खराब… और विभाग में इनकी मरम्मत के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं दिखती।


ग्रामीणों की शिकायत है कि—
“कई बार मरीजों को समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलती। अगर ये गाड़ियां चलती होतीं तो कई लोगों की जान बच सकती थी।”
इन वाहनों में जननी सुरक्ष योजना, टीकाकरण, मोबाइल मेडिकल यूनिट और अन्य स्वास्थ्य मिशन से जुड़ी गाड़ियां भी शामिल होने की आशंका है—जो आम तौर पर गांवों में सबसे ज्यादा जरूरत वाली सेवाएं देती हैं।
सवाल यह उठता है कि—
सरकारी संपत्ति होते हुए भी इन गाड़ियों को कौन नजरअंदाज कर रहा है?
मरम्मत बजट कहां अटक रहा है?
और जब स्वास्थ्य मिशन की जिम्मेदारी लोगों तक सेवाएं पहुंचाने की है, तो क्या यह लापरवाही मरीजों की जान से खेलना नहीं है?
फिलहाल विभाग की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जिले के लोग उम्मीद लगाए बैठे हैं कि स्वास्थ्य विभाग जल्द कार्रवाई करेगा और इन बीमार गाड़ियों का इलाज शुरू होगा… ताकि इलाज के इंतजार में कोई मरीज दम न तोड़ दे।




