एंटरटेनमेंट

IFFI 2025 की आखिरी रात में आमिर खान का जलवा, बोले—“मैं एक्टिविस्ट नहीं, सबसे पहले एंटरटेनर हूँ”

56वें भारत अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI 2025) की समापन शाम उस वक्त खास बन गई, जब बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान फायरसाइड चैट के मंच पर पहुंचे। कला अकादमी में दर्शकों से खचाखच भरे हॉल ने आमिर का जोरदार स्वागत किया और अगले डेढ़ घंटे तक पूरा माहौल एक शानदार संवाद में बदल गया। सेशन का संचालन प्रसिद्ध फिल्म समीक्षक बरद्वाज रंगन ने किया।

चर्चा की शुरुआत दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र को श्रद्धांजलि से हुई। आमिर खान ने कहा कि वे धर्मेंद्र की फिल्मों को देखकर बड़े हुए और उन्हें भारतीय सिनेमा का एक ऐसा नाम बताया जिसकी रेंज, करिश्मा और सहज अभिनय हर पीढ़ी को प्रेरित करता रहा है। आमिर ने कहा—“धरमजी को ही-मैन कहा जाता था, लेकिन वे रोमांस, कॉमेडी और ड्रामा हर जॉनर में बेहतरीन थे। उनका जाना व्यक्तिगत और कलात्मक दोनों तरह से बड़ी क्षति है।”

आमिर खान ने इस बातचीत में अपनी फिल्मी सोच, अपने चुनावों और अपने रचनात्मक सफर के बारे में खुलकर बातें कीं। उन्होंने बताया कि कहानियों के प्रति उनका आकर्षण बचपन से रहा है और उसी ने उन्हें हमेशा गाइड किया। रेडियो के ‘हवा महल’ और दादी की कहानियाँ उनके अंदर कहानी कहने और सुनने का प्रेम जगाती रहीं।

उन्होंने स्वीकार किया कि फिल्मों का चुनाव वे किसी ट्रेंड या फार्मूले के आधार पर नहीं, बल्कि पूरी तरह अपने भीतर की उत्सुकता पर करते हैं। उनके शब्दों में—
“मैं खुद को रिपीट नहीं कर सकता। मैं हमेशा ऐसी कहानियों की तलाश में रहता हूँ जो फ्रेश हों और मुझे क्रिएटिव चुनौती दें।”

आमिर ने कहा कि इंडस्ट्री में कई लोग बॉक्स ऑफिस ट्रेंड्स के हिसाब से फिल्में प्लान करते हैं, लेकिन उन्होंने कभी यह रास्ता नहीं अपनाया। लगान का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यह फिल्म हर व्यावसायिक लॉजिक के खिलाफ थी, फिर भी उन्होंने वही चुना जो दिल ने कहा।

कई फिल्मों के सामाजिक संदेशों पर बात करते हुए आमिर ने साफ कहा—
“मैं एक्टिविस्ट नहीं हूँ, मैं संपूर्ण फिल्मी व्यक्तित्व हूँ। दर्शक मनोरंजन के लिए आते हैं, लेक्चर सुनने नहीं। अगर किसी कहानी में सामाजिक संदेश है, तो वह बोनस है, उद्देश्य नहीं।”

उन्होंने बताया कि तारे ज़मीन पर, 3 इडियट्स, दंगल और लापता लेडीज़ जैसी फिल्मों की ताकत उनके लेखकों की थी। आमिर का कहना था कि वे उन कहानियों की ओर खिंचे जिन्हें पढ़ते हुए उन्हें भावनात्मक जुड़ाव महसूस हुआ।

चर्चा के दौरान आमिर ने अपने आने वाले करियर प्लान भी सामने रखे। उन्होंने कहा कि उनके प्रोड्यूस किए हुए प्रोजेक्ट्स—लाहौर 1947, हैप्पी पटेल और अन्य—अगले कुछ महीनों में पूरे हो जाएंगे। इसके बाद वे पूरी तरह से एक्टर के रूप में वापसी करेंगे।
उन्होंने घोषणा की—
“अब जो भी स्क्रिप्ट सुनी जाएगी, वह सिर्फ एक एक्टर की तरह होगी। यह मेरे करियर का बड़ा बदलाव है।”

डायरेक्शन पर पूछे गए सवाल पर आमिर ने साफ कहा कि यह उनका सबसे बड़ा प्यार है, लेकिन जब भी वे उस दिशा में गंभीर कदम उठाएँगे, शायद एक्टिंग छोड़नी पड़ सकती है, क्योंकि निर्देशन उन्हें पूरी तरह समर्पण की मांग करता है। इसलिए वे अभी उस फैसले को कुछ समय के लिए टाल रहे हैं।

इस चर्चा ने IFFI 2025 की आखिरी शाम को बेहद यादगार बना दिया। दर्शक हर बात पर तालियों से प्रतिक्रिया देते रहे और आमिर खान ने अपनी साफगोई, ह्यूमर और गहराई से इस बातचीत को खास बना दिया।

IFFI 1952 में शुरू हुआ दक्षिण एशिया का सबसे प्रतिष्ठित फिल्म महोत्सव माना जाता है, जिसे NFDC, भारत सरकार और गोवा सरकार मिलकर आयोजित करते हैं। 20 से 28 नवंबर तक चला यह 56वां संस्करण इंटरनेशनल सिनेमा, मास्टरक्लास, फिल्म बाजार और नई आवाज़ों का शानदार संगम रहा।

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