जांजगीर-चांपा

खिसोरा धान मंडी में खुला खेल: तौल में हेराफेरी, रिश्वतखोरी और धमकी के आरोप, किसानों में दहशत

लोकेशन: जांजगीर–चांपा (बलौदा तहसील)
रिपोर्टर: जय ठाकुर

छत्तीसगढ़ के जांजगीर–चांपा जिले की बलौदा तहसील अंतर्गत खिसोरा धान उपार्जन मंडी इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। मंडी अध्यक्ष सुरेश राठौर और मंडी प्रभारी जगत पर किसानों के साथ धोखाधड़ी, तौल में भारी गड़बड़ी, रिश्वतखोरी और खुलेआम धमकी देने जैसे गंभीर आरोप सामने आए हैं। किसानों का आरोप है कि सरकारी समर्थन मूल्य पर धान खरीदी के नाम पर यहां उन्हें लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।

धान खरीदी सीजन के दौरान मंडी में पहुंच रहे किसानों का कहना है कि उनके द्वारा घर से तौला गया धान मंडी में पहुंचते ही कम वजन दिखाया जाता है। आरोप है कि तौल प्रक्रिया में जानबूझकर हेराफेरी की जा रही है, जिससे प्रति बोरी और प्रति क्विंटल किसानों को कम भुगतान मिलता है। किसानों के अनुसार यह सीधे तौर पर उनके हक पर डाका डालने जैसा है।

मामला यहीं नहीं रुकता। किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि एफएक्यू (फेयर एवरेज क्वालिटी) मानकों के विपरीत खराब गुणवत्ता वाले धान को भी पैसे लेकर स्वीकार किया जा रहा है। रिश्वत के दम पर घटिया धान की खरीदी से न केवल सरकारी नियमों की अनदेखी हो रही है, बल्कि ईमानदार किसानों को नुकसान और सरकारी तंत्र की साख को भी ठेस पहुंच रही है।

सबसे गंभीर और चिंताजनक आरोप मंडी प्रबंधन के व्यवहार को लेकर हैं। किसानों का कहना है कि मंडी अध्यक्ष और प्रभारी शिकायत करने पर बदतमीजी करते हैं और खुलेआम धमकी देते हैं। कई किसानों ने बताया कि उन्हें कहा जाता है कि ज्यादा बोलोगे तो धान नहीं खरीदा जाएगा। मंडी में शिकायत दर्ज कराने की कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है, जिससे किसानों में डर और असहायता का माहौल बना हुआ है।

इस पूरे मामले में एक और सनसनीखेज पहलू सामने आया है। आरोप है कि मंडी अध्यक्ष पत्रकारों को भी डराने-धमकाने का प्रयास कर रहा है। मंडी के आसपास जाने वाले पत्रकारों को चेतावनी दी जा रही है कि यदि मंडी की अनियमितताओं को उजागर किया गया तो अंजाम भुगतना पड़ेगा। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या मंडी में सब कुछ दबाव और भय के माहौल में संचालित किया जा रहा है।

धान खरीदी 15 नवंबर से पूरे प्रदेश में शुरू हो चुकी है और सरकार किसानों से पारदर्शी व्यवस्था के तहत खरीदी का दावा कर रही है। ऐसे में खिसोरा मंडी से सामने आए ये आरोप न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहे हैं। किसान संगठनों ने जिला प्रशासन से तत्काल उच्चस्तरीय जांच, इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीनों की जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। अब निगाहें जिला कलेक्टर और खाद्य विभाग पर टिकी हैं कि क्या खिसोरा धान मंडी में चल रही कथित मनमानी पर लगाम लगेगी या फिर किसानों की आवाज यूं ही दबती रहेगी।

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