सरगुजा में धान खरीदी व्यवस्था चरमराई – रकबा कम होने से किसानों में आक्रोश, लहपटरा के ग्रामीणों ने किया मुख्य मार्ग जाम का प्रयास

लोकेशन – अंबिकापुर
रिपोर्टर – विनीत मिश्रा
छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को एक महापर्व की तरह माना जाता है।
क्योंकि राज्य सरकार किसानों से 31 सौ रुपए प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर धान खरीदती है, और किसान हर साल बढ़-चढ़कर अपनी उपज बेचने समितियों तक पहुंचते हैं।
लेकिन इस बार सरगुजा जिले में धान खरीदी की व्यवस्था काफी हद तक चरमराई हुई दिखाई दे रही है।
लगभग सभी समितियों में अव्यवस्था का अंबार है—किसानों की लाइनें लंबी, प्रक्रिया धीमी और रकबा सत्यापन को लेकर भारी भ्रम…
इसी समस्या को लेकर आज ग्राम पंचायत लहपटरा के सैकड़ों ग्रामीण अंबिकापुर–बिलासपुर मुख्य मार्ग पर जाम लगाने पहुंच गए।


हालांकि प्रशासन ने तत्काल पुलिस बल तैनात कर दिया और चक्का जाम होने नहीं दिया…
लेकिन किसानों का आक्रोश साफ दिखा। ग्रामीणों का आरोप है कि इस वर्ष उनके रकबे में भारी कटौती कर दी गई है।
कई किसानों ने बताया कि वे तीन–तीन दिनों से तहसील और समिति के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन रकबा ठीक नहीं हो पा रहा है।

किसानों का कहना है कि पहले पटवारी द्वारा गिरदावरी किए जाने से ऐसी समस्या कम होती थी,
लेकिन इस वर्ष मोबाइल ऐप आधारित प्राइवेट एजेंसी से गिरदावरी कराई गई, जिससे जमीन की माप–तौल और रिकॉर्ड में गड़बड़ियाँ बढ़ गईं।
इसी वजह से ग्रामीणों को धान बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
किसानों ने जिला प्रशासन से तुरंत रकबा सुधार की मांग की है, ताकि खरीदी प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो सके।




