
लोकेशन : सिलसिला, सरगुजा
संवाददाता : विनीत मिश्रा
सरगुजा जिले के सिलसिला स्थित मां कुदरगढ़ी एल्यूमिनियम रिफाइनरी प्लांट में कार्यरत एक मजदूर की भीषण सड़क दुर्घटना में हुई मौत ने फैक्ट्री प्रबंधन की संवेदनहीनता और औद्योगिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक मजदूर अनिल नाई, जो बीते दो वर्षों से प्लांट में कार्यरत था, ड्यूटी समाप्त कर घर लौट रहा था, तभी यह हादसा हुआ। आरोप है कि हादसे के बाद भी फैक्ट्री प्रबंधन ने समय पर कोई मदद नहीं की।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बुधवार को ड्यूटी खत्म होने के बाद जैसे ही मजदूर अनिल नाई प्लांट गेट से बाहर निकला, उसी दौरान ट्रेलर क्रमांक HR 58 E 5154 के चालक ने लापरवाहीपूर्वक वाहन चलाते हुए उसे टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ट्रेलर चालक मौके से फरार हो गया। हादसे में अनिल नाई गंभीर रूप से घायल हो गया और लगभग 20 मिनट तक सड़क पर तड़पता रहा।


हैरानी की बात यह रही कि करोड़ों रुपये के इस औद्योगिक प्रतिष्ठान में न तो एंबुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई गई और न ही कोई प्राथमिक चिकित्सा व्यवस्था की गई। मजदूरों का आरोप है कि यदि समय रहते एंबुलेंस और उपचार मिल जाता, तो अनिल नाई की जान बचाई जा सकती थी। अंततः घायल मजदूर को निजी वाहन से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
इस घटना ने फैक्ट्री प्रबंधन की घोर लापरवाही और मजदूरों की सुरक्षा के प्रति उदासीन रवैये को उजागर कर दिया है। मजदूरों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में कार्यरत मजदूरों को न तो ईएसआई का लाभ दिया जा रहा है और न ही किसी प्रकार का वैधानिक बीमा। बताया जा रहा है कि इससे पहले भी फैक्ट्री में कार्यरत चार मजदूरों की मौत हो चुकी है, जो दूसरे राज्य के निवासी थे।
कानून के तहत फैक्ट्री परिसर या उसके आसपास किसी भी दुर्घटना की स्थिति में प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है कि वह तत्काल पुलिस और फैक्ट्री इंस्पेक्टर को सूचना दे, कारखाना अधिनियम की धारा 88 के तहत रिपोर्ट प्रस्तुत करे और मृतक के परिजनों को मुआवजा उपलब्ध कराए। लेकिन इस मामले में अब तक फैक्ट्री प्रबंधन की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
मृतक के परिजनों और स्थानीय मजदूर संगठनों ने फैक्ट्री प्रबंधन से उचित मुआवजा, फरार ट्रेलर चालक की गिरफ्तारी और प्रबंधन के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिजनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या मृतक मजदूर के परिवार को न्याय मिल पाता है।




