वंदे मातरम् बहस में संसद गरमाई: प्रियंका गांधी का प्रधानमंत्री मोदी पर पलटवार — “जितने दिन मोदी पीएम, उतने ही दिन नेहरू जेल में रहे”

नई दिल्ली। संसद में वंदे मातरम् की बहस के दौरान सोमवार को राजनीति अपने चरम पर पहुंच गई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि “जितने साल मोदी प्रधानमंत्री रहे, लगभग उतने ही साल जवाहरलाल नेहरू ने आज़ादी की लड़ाई में जेल में बिताए।”
प्रियंका गांधी के इस बयान के बाद सदन में हंगामा मच गया। उन्होंने कहा कि सरकार इतिहास को तोड़ने-मरोड़ने की कोशिश कर रही है और वंदे मातरम् विवाद को बंगाल चुनावों की राजनीति से जोड़ रही है।
सरकार के दावों पर प्रियंका का काउंटर
प्रियंका गांधी ने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं द्वारा वंदे मातरम् के इतिहास को जानबूझकर गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि नेहरू, गांधी और टैगोर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम् पर हमेशा सकारात्मक और संतुलित विचार रखे, लेकिन भाजपा इसे मुस्लिम लीग और तुष्टीकरण की बहस तक सीमित कर रही है।
नेहरू की जेल यात्रा का तथ्य सामने रखा
प्रियंका गांधी ने तंज कसते हुए कहा—
“जितने दिन मोदी प्रधानमंत्री रहे, नेहरू उतने ही दिन जेल में रह चुके हैं। यह इतिहास है, जिसे बदला नहीं जा सकता।”
रिकॉर्ड के मुताबिक जवाहरलाल नेहरू कुल 9 बार जेल गए और 3258 दिन कारावास में रहे। वहीं नरेंद्र मोदी अब तक 4200 दिनों से अधिक समय से प्रधानमंत्री पद पर हैं।
सरकार की ‘चुनावी रणनीति’ बताई
प्रियंका ने कहा कि वंदे मातरम् की आड़ में सरकार असली मुद्दों से ध्यान हटाना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह बहस बंगाल चुनाव से पहले जानबूझकर गर्म की जा रही है ताकि लोगों का ध्यान बेरोजगारी, महंगाई और किसानों की समस्याओं से हटाया जा सके।
कांग्रेस का पलटवार तेज— भाजपा पर इतिहास विकृत करने का आरोप
कांग्रेस ने कहा कि भाजपा ने वंदे मातरम् को जानबूझकर सांप्रदायिक रंग दिया, जबकि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान हिंदू-मुस्लिम सभी वर्गों ने इसे सम्मान दिया था। पार्टी नेताओं ने RSS पर भी आरोप लगाया कि उसने आज़ादी के आंदोलन में भाग नहीं लिया और आज वही संगठन राष्ट्रवाद पर लेक्चर दे रहा है।
निचोड़
वंदे मातरम् पर चली बहस अब सिर्फ गीत या इतिहास की चर्चा नहीं रह गई है। यह बहस अब सत्ता बनाम विपक्ष, इतिहास बनाम राजनीति और विचारधारा की जंग में बदल चुकी है। संसद से लेकर सोशल मीडिया तक यह मुद्दा अगले कई दिनों तक राजनीति के केंद्र में रहेगा।




