आत्मनिर्भरता की राह: दंतेवाड़ा में पुनर्वासित युवाओं को जैविक खेती और पर्यटन का व्यावहारिक प्रशिक्षण

दंतेवाड़ा
छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में पुनर्वासित युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल की गई है। जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के संयुक्त प्रयास से जैविक खेती और पर्यटन क्षेत्र में युवाओं के लिए एक विशेष शैक्षिक एवं प्रशिक्षण यात्रा का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को ऑर्गेनिक फार्मिंग की आधुनिक तकनीक, रासायनिक मुक्त खेती, जैविक खाद निर्माण, फसल चक्र, और प्राकृतिक कीट नियंत्रण के तरीकों की व्यावहारिक जानकारी दी गई। साथ ही, उन्हें यह भी बताया गया कि जैविक उत्पादों की बाजार में बढ़ती मांग को किस तरह आजीविका के अवसर में बदला जा सकता है।


पर्यटन क्षेत्र में युवाओं को इको-टूरिज्म, ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय संस्कृति आधारित पर्यटन की संभावनाओं से अवगत कराया गया। प्रशिक्षण के दौरान पर्यटन स्थलों पर मार्गदर्शन, होम-स्टे संचालन, स्थानीय हस्तशिल्प और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण जैसे विषयों पर भी जानकारी दी गई।
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य केवल प्रशिक्षण देना नहीं, बल्कि युवाओं में आत्मविश्वास और स्वरोजगार की सोच विकसित करना है। इससे वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि अपने क्षेत्र में रोजगार सृजन के नए अवसर भी पैदा कर सकेंगे।
प्रशासन का मानना है कि इस तरह के कार्यक्रमों से पुनर्वासित युवाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने में मदद मिलेगी और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास की नींव मजबूत होगी।

