पेंटागन ने बदली राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति, सहयोगी देशों पर बढ़ाई जिम्मेदारी

नई रक्षा नीति में अमेरिका फर्स्ट पर जोर, यूरोप–नाटो सहयोगियों को अपनी सुरक्षा खुद संभालने की सलाह
वॉशिंगटन | रिपोर्ट
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय पेंटागन ने अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए नया राष्ट्रीय रक्षा दस्तावेज जारी किया है। 34 पन्नों की यह रणनीति 2022 के बाद पहली बार प्रकाशित हुई है, जिसमें अमेरिका के सहयोगी देशों की भूमिका और जिम्मेदारी को लेकर कड़ा रुख अपनाया गया है।
नई नीति में साफ कहा गया है कि अमेरिका के सहयोगी देश लंबे समय से अपनी सुरक्षा के लिए वाशिंगटन पर निर्भर रहे हैं और अब उन्हें रूस, उत्तर कोरिया जैसे खतरों से निपटने में ज्यादा बोझ उठाना होगा। दस्तावेज में प्राथमिकताओं, दृष्टिकोण और रणनीतिक फोकस में “तेज बदलाव” की जरूरत बताई गई है।
अमेरिका फर्स्ट पर जोर
पेंटागन की यह रणनीति ट्रंप प्रशासन की “अमेरिका फर्स्ट” नीति को आगे बढ़ाती है। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी हितों को लंबे समय तक नजरअंदाज किया गया और अब घरेलू व पश्चिमी गोलार्ध की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
यूरोप और नाटो पर दबाव
रणनीति में रूस को यूरोप और नाटो के लिए एक निरंतर लेकिन प्रबंधनीय खतरा बताया गया है। साथ ही कहा गया है कि नाटो सहयोगी इतने सक्षम हैं कि वे यूरोप की पारंपरिक रक्षा की मुख्य जिम्मेदारी खुद उठा सकें। पेंटागन ने संकेत दिया है कि यूरोपीय क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को समायोजित किया जा सकता है।
ग्रीनलैंड और पनामा नहर पर फोकस
दस्तावेज में ग्रीनलैंड और पनामा नहर को रणनीतिक रूप से अहम बताया गया है। पेंटागन ने पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी हितों की “निर्णायक और निडर” रक्षा की बात कही है, साथ ही चेतावनी दी है कि सहयोगी देश साझा हितों का सम्मान करें।
चीन को लेकर संतुलित रुख
नई रणनीति में चीन को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक बड़ी शक्ति बताया गया है, लेकिन यह भी स्पष्ट किया गया है कि अमेरिका का लक्ष्य चीन पर प्रभुत्व जमाना या शासन परिवर्तन नहीं है। पेंटागन के अनुसार, अमेरिका चीन के साथ स्थिर शांति, निष्पक्ष व्यापार और सैन्य संवाद बनाए रखना चाहता है।
ताइवान पर चुप्पी
इस रणनीति में ताइवान को लेकर कोई स्पष्ट सुरक्षा गारंटी नहीं दी गई है, जो 2022 की नीति से अलग रुख दर्शाता है।
एशिया और कोरियाई प्रायद्वीप
दस्तावेज में कहा गया है कि दक्षिण कोरिया उत्तर कोरिया को रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी संभालने में सक्षम है, जिसमें अमेरिका सीमित लेकिन अहम समर्थन देगा।




