सक्ती

ग्रामीण महिला सशक्तिकरण पर शोध के लिए प्रो. मथुरा महिलांगे को पीएचडी उपाधि, शिक्षा जगत में नई मिसाल

लोकेशन: सक्ती, छत्तीसगढ़
रिपोर्टर: दीपक यादव

सक्ति जिले से गौरवपूर्ण खबर है। ग्रामीण महिला सशक्तिकरण पर अपने अनवरत अध्ययन और शोध के लिए प्रो. मथुरा महिलांगे माहेश्वरी को अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर द्वारा डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान की गई है। यह उपलब्धि उनके व्यक्तिगत जीवन के लिए ही नहीं, बल्कि प्रदेश के शैक्षणिक क्षेत्र में भी नए प्रेरणा स्रोत का निर्माण करती है।

प्रो. महिलांगे का जन्म और पालन-पोषण सक्ती जिले के ग्राम फरसवानी-डभरा में हुआ। वे वर्तमान में शासकीय वेदराम महाविद्यालय, मालखरौदा में शिक्षकीय दायित्व निभा रही हैं। उनके शोध का विषय था “ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण—छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के ग्रामीण संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय अध्ययन”, जो ग्रामीण महिलाओं की वर्तमान स्थिति, उनके सामने आने वाली चुनौतियों और समाज में उनके सशक्तिकरण के मार्गों पर गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत करता है।

शोध कार्य का निर्देशन डॉ. साधना सोम (विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र, डीपी.विप्र. महाविद्यालय, बिलासपुर) ने किया, साथ ही सह-निर्देशक डॉ. के.पी. कुर्रे और डॉ. महेश पाण्डेय सहित अनेक शिक्षकों ने मार्गदर्शन प्रदान किया। इस उपलब्धि पर प्रो. महिलांगे ने अपने परिवार, शिक्षकों और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि यह सफलता सामूहिक प्रयास और विश्वास का परिणाम है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह शोध आज की ग्रामीण स्त्री की वास्तविक स्थिति, उनके विकास के रास्ते और समाज में उनकी भागीदारी को उजागर करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा। प्रो. महिलांगे की यह उपलब्धि जांजगीर-चांपा और सक्ती जिले के लिए गौरव का विषय होने के साथ-साथ सभी विद्यार्थियों और शोधार्थियों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है।

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