जांजगीर-चांपा

शराब की बोतल में जहर — गंदगी पर विभाग की चुप्पी, जनता की सेहत खतरे में

जांजगीर-चांपा जिले से एक ऐसी हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है, जो आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गहरे सवाल खड़े करती है। जिले की नैला मदिरा दुकान से खरीदी गई शराब की बोतलों के अंदर गंदगी, धूल और कचरे जैसे तत्व पाए गए हैं। ये वही बोतलें हैं, जो रोजाना सैकड़ों उपभोक्ताओं तक पहुँचती हैं, और लोग पूरी निश्चिंतता से इन्हें अपने गिलास में उड़ेल लेते हैं — यह जाने बिना कि वे शराब नहीं, बल्कि “जहर” पी रहे हैं।

हमारी टीम ने जब इन बोतलों की बारीकी से जांच की, तो कई बोतलों के अंदर तैरते कचरे और जमा धूल ने साफ कर दिया कि पैकिंग से पहले न तो सफाई का ध्यान रखा जा रहा है और न ही कोई जांच प्रक्रिया सही तरीके से की जा रही है। यह लापरवाही सीधे उपभोक्ताओं की सेहत के साथ खिलवाड़ है।

स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि वे हमेशा सरकारी दुकान से शराब खरीदते हैं, यह मानकर कि सब कुछ नियमों के अनुसार होगा। लेकिन जब बोतल के अंदर की गंदगी देखी, तो डर बैठ गया कि कहीं यह शराब नहीं, बीमारी की बोतल तो नहीं बन गई है।

एक ग्रामीण ने कहा, “हम तो भरोसे से खरीदते हैं, पर अब लग रहा है कि ये शराब नहीं जहर है। इतना गंदा पानी तो कोई पी भी नहीं सकता, फिर शराब में ये गंदगी कैसे?”

शराब की हर बोतल पर लिखा होता है — “मद्यपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।”
लेकिन अब ये पंक्ति एक कड़वी सच्चाई बन चुकी है। यह शराब केवल “हानिकारक” नहीं, बल्कि “खतरनाक” साबित हो रही है।

आबकारी विभाग को इस पूरे मामले की जानकारी दी गई, लेकिन हैरानी की बात है कि अब तक किसी भी अधिकारी ने मौके पर जाकर जांच करने की ज़रूरत नहीं समझी। न कोई निरीक्षण, न कोई जवाब — मानो विभाग ने आंखों पर पट्टी और कानों में रूई ठूंस ली हो।

लोग पूछ रहे हैं —
जब पैकिंग यूनिट्स की सफाई तक नहीं हो रही, तो आबकारी विभाग आखिर किस नींद में सोया है?
क्या यह सब विभागीय मिलीभगत का परिणाम है, या फिर जनता की सेहत का मूल्य अब राजस्व की दौड़ में खो गया है?

अब यह ज़रूरी है कि प्रशासन इस पूरे मामले की पारदर्शी जांच कराए और दोषियों पर कार्रवाई करे, ताकि लोगों का विश्वास व्यवस्था पर कायम रहे।

कटाक्षपूर्ण अंत:
जिस विभाग की जिम्मेदारी थी “शराब को नियंत्रित” करने की, वही अब “गंदगी में डूबा” दिख रहा है। सवाल यह नहीं कि बोतल में क्या निकला — सवाल यह है कि जवाबदेही कब निकलेगी?

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