कोरबा

बर्खास्तगी का ज़हर या सिस्टम की बेरुखी?नगर सैनिक का आत्मघाती कदम, प्रशासन कटघरे में

रिपोर्टर:- सरोज रात्रे
लोकेशन:- कोरबा

गणतंत्र दिवस के दिन, जब पूरा देश आज़ादी और लोकतंत्र का उत्सव मना रहा था, उसी दिन एक वर्दीधारी जवान की ज़िंदगी दर्द और सिस्टम की बेरुखी से जूझती नज़र आई। कोरबा में पदस्थ नगर सैनिक संतोष पटेल ने कलेक्टर परिसर में ज़हर सेवन कर आत्महत्या का प्रयास किया, जिससे पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया। गंभीर हालत में संतोष पटेल को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां वह जिंदगी और मौत से संघर्ष कर रहा है।

पीड़ित नगर सैनिक संतोष पटेल का आरोप है कि कोरबा कमांडेंट और डिवीजनल कमांडेंट द्वारा उसे लंबे समय से मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था। बर्खास्तगी के बाद उसकी मानसिक स्थिति और अधिक बिगड़ गई। संतोष का कहना है कि उसने कई बार अपनी शिकायतें उच्च अधिकारियों तक पहुंचाईं, लेकिन सिस्टम ने आंखें मूंदे रखीं और कहीं से भी न्याय नहीं मिला।

संतोष पटेल द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में गंभीर और चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। उसमें उल्लेख है कि केवल वही नहीं, बल्कि कोरबा में पदस्थ कई महिला और पुरुष नगर सैनिक भी लगातार मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रहे हैं। शिकायतें और आंदोलन होने के बावजूद अब तक किसी भी स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं की गई।

आरोप यह भी है कि जब-जब पीड़ितों ने अपनी आवाज़ उठाने की कोशिश की, तब-तब दबाव और प्रताड़ना और बढ़ा दी गई। इस घटना के बाद अन्य नगर सैनिकों में भारी आक्रोश है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल प्रशासन और पुलिस अधिकारी स्थिति को संभालने और नगर सैनिक की जान बचाने में जुटे हैं, लेकिन यह घटना सिस्टम की संवेदनहीनता पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या वर्दीधारी जवानों की कोई सुनवाई नहीं होती, क्या शिकायत करना अपराध बन चुका है, और यदि संतोष पटेल को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा।

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