सरगुजा में विकास की पोल—सड़क अभाव में गर्भवती को झेलेगी से ले जाना पड़ा, रास्ते में ही हुआ प्रसव

अंबिकापुर/सरगुजा
संभाग के कई इलाकों में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है। बतौली थाना क्षेत्र के करना-कदनई गांव से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां सड़क न होने की वजह से गर्भवती महिला को झेलेगी (बांस से बनी पारंपरिक स्ट्रेचर) के सहारे 2 से 3 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग तक ले जाना पड़ा। रास्ते में ही महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और झेलेगी पर ही बच्चे का जन्म हो गया।
जानकारी के मुताबिक, गांव के पण्डो जनजाति के लोगों ने मिलकर गर्भवती महिला को झेलेगी में बैठाया और कच्चे पहाड़ी रास्तों से होते हुए पैदल ही सड़क तक पहुंचे। सड़क तक पहुंचने के बाद उन्हें निजी वाहन से बतौली स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया। इस घटना ने क्षेत्र की जमीनी हकीकत एक बार फिर उजागर कर दी है।
मामले ने राजनीतिक तूल भी पकड़ लिया है। पूर्व डिप्टी सीएम टी.एस. सिंहदेव ने घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि “पूरे छत्तीसगढ़ में ऐसे कम से कम 100 इलाके आज भी पहुंच विहीन हैं, जहां सड़क नहीं—झेलेगी ही एकमात्र सहारा होती है। ऐसे क्षेत्रों पर सरकार का ध्यान न जाना गंभीर असंवेदनशीलता है। रायपुर और शहरी इलाकों के विकास पर फोकस है, लेकिन दूरस्थ अंचलों में रहने वाले लोगों की मूलभूत समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा है।”
घटना ने एक बार फिर इस सवाल को सामने ला खड़ा किया है कि आधुनिक युग में भी कई ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं क्या सिर्फ कागजों में ही उपलब्ध हैं? क्या विकास योजनाएं इन इलाकों तक वास्तव में पहुँचती हैं?
सरगुजा के कठिन भौगोलिक क्षेत्र और प्रशासनिक उपेक्षा के कारण ऐसी घटनाएं अब भी सामने आती रहती हैं, जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।




